हरजिंदर कौर के खेल जीवन की पृष्ठभूमि ऐसी है कि उनके अभ्यास, खेल उपकरणों और पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके परिवार को जमीन तक बेचनी पड़ी। यहां उल्लेखनीय है कि हरजिंदर कौर कबड्डी और रस्साकसी की भी राज्य स्तरीय खिलाड़ी रही हैं।

बहरहाल पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में वेटलिफ्टिंग के कोच परमजीत शर्मा ने रस्साकसी में उनकी प्रतिभा देखकर उन्हें वेटलिफ्टिंग के प्रति फोकस करने का सुझाव दिया। इसके बाद हरजिंदर कौर ने साल 2016 में पंजाबी यूनिवर्सिटी से वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की। अगस्त 2021 में पटियाला में आयोजित वेट लिफ्टिंग के राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा लिया। साल 2021 में कामनवेल्थ वेट लिफ्टिंग सीनियर चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल जीता।

हरजिंदर कौर के लिए वेटलिफ्टिंग का सफर आसान नहीं रहा। लड़की होने के चलते वेटलिफ्टिंग के कारण शरीर पर बुरा असर पड़ने की बात कही गई । इससे हतोत्साहित होकर उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ दी थी और घर लौट आईं।

कुछ हफ्ते घर पर रहीं। उसके बाद कोच और घरवालों ने काफी समझाया। इसके बाद फिर से प्रैक्टिस शुरू की। हरजिंदर कौर परिवार में सबसे छोटी हैं। एक बड़ा भाई और बड़ी बहन है।

जब उनका जन्म हुआ तो परिवार को काफी निराशा हुई लेकिन जब बीते बर्मिंघम कामनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता तो पिता ने कहा, तुम मेरी बेटी नहीं, बेटा हो । इससे ज्यादा गर्व आज तक कभी महसूस नहीं हुआ।