फ्रांस के एवियन में जी-7 समिट के इतर मिले पीएम मोदी और जेलेंस्की, द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 समिट के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ हुई उच्च स्तरीय चर्चाओं के ठीक बाद आयोजित हुई।
दोनों नेताओं के बीच पिछली सीधी बातचीत पिछले साल 30 अगस्त को फोन पर हुई थी, जिसके बाद इस वैश्विक मंच पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने आमने-सामने बैठकर विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों की समीक्षा की है।
मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट के जरिए बैठक की आधिकारिक जानकारी साझा की। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और यूक्रेन के बीच हाल के समय में बातचीत और सहयोग का दायरा बढ़ा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहेगा और किसी भी वैश्विक संकट के समाधान में इंसानियत को सबसे ऊपर रखेगा। दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए कि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस लाने के लिए प्रयास तेज किए जाने चाहिए।
बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने भी भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक बयान जारी किया। जेलेंस्की ने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश पहले से ही कुछ संयुक्त प्रोजेक्ट्स को धरातल पर लागू कर रहे हैं।
इस वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर गहन चर्चा की कि इन चालू प्रोजेक्ट्स को कैसे और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि आपसी हित वाले संबंध विकसित हो सकें।
रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नया विस्तार देने के लिए दोनों देशों के नेतृत्व ने व्यावहारिक कदम उठाने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, औद्योगिक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों की टीमें मिलकर काम करेंगी।
इसके लिए यह तय किया गया है कि भारत और यूक्रेन की प्रशासनिक व तकनीकी टीमें सभी जरूरी बिंदुओं को चिन्हित कर एक साझा कार्ययोजना तैयार करेंगी, जिससे इस द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जा सके।
