चंडीगढ़ में मांस-मछली की दुकानों को लेना होगा NOC, बिना मुहर वाला मीट मिला तो 25 हजार जुर्माना
चंडीगढ़ में मांस, मछली और पोल्ट्री की बिक्री से जुड़े कारोबार के लिए नगर निगम नए नियम लागू करने की तैयारी में है। वर्ष 2026 के प्रस्तावित बायलॉज में मांस-मछली की दुकानों के साथ होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, फूड कोर्ट और क्लाउड किचन को भी शामिल किया गया है।
इनके संचालन के लिए हर साल नगर निगम से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ संबंधित प्रतिष्ठान के पास एफएसएसएआई लाइसेंस भी होना जरूरी होगा।
नगर निगम के जनरल हाउस के एजेंडा आइटम नंबर पांच में ड्राफ्ट बायलॉज को सैद्धांतिक मंजूरी देकर 15 दिन के लिए जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके बाद प्राप्त सुझावों को सदन के समक्ष रखा जाएगा और अंतिम मंजूरी के बाद बायलॉज को आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया जाएगा। नए नियम लागू होने पर वर्ष 2002 के मौजूदा बायलॉज, जिनमें 2010 में संशोधन हुआ था, समाप्त हो जाएंगे।
स्लॉटर हाउस से निकलने वाले मांस की पोस्टमार्टम जांच के बाद नगर निगम की आधिकारिक मुहर लगाई जाएगी। बिना मुहर, बिना दस्तावेज या बिना निरीक्षण वाला मांस मिलने पर उसे जब्त कर नष्ट किया जा सकेगा।
नए बायलॉज में मांस की दुकानों और कमर्शियल किचन के लिए स्वच्छता और संरचनात्मक मानक तय किए गए हैं। मीट हैंडलिंग और तैयारी वाले हिस्से एयर कंडीशंड होने चाहिए। कटिंग और तैयारी के लिए ग्रेड-304 स्टेनलेस स्टील, पॉलिश्ड मार्बल या ग्रेनाइट की सतह जरूरी होगी।
लकड़ी के कटिंग ब्लॉक और टेबल पर मांस काटने पर रोक होगी। कच्चे मांस को चार डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले रेफ्रिजरेटेड डिस्प्ले में और डीप फ्रीजर में माइनस 18 डिग्री या उससे कम तापमान पर रखना होगा।
दुकानदारों, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को मांस, पोल्ट्री, पोर्क और मछली की खरीद का रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें खरीद की तारीख, मात्रा, सप्लायर का नाम, लाइसेंस और बिल या इनवॉयस की जानकारी दर्ज करनी होगी। संबंधित दस्तावेज कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखने होंगे।
