चंडीगढ़: तेज बारिश ने खोली नगर निगम व प्रशासन की पोल, सड़कों पर पानी ही पानी
रोड-गलियों की सफाई के दावे हवा-हवाई, करोड़ों का बजट पानी में बहा;
हल्लोमाजरा में बारिश के पानी के साथ सीवरेज ओवरफ्लो, घरों में घुसा पानी
चंडीगढ़, 18 अगस्त। चंडीगढ़ में तेज बारिश ने एक बार फिर नगर निगम और प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में सड़कें जलमग्न हो गईं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जगह-जगह जलभराव के कारण वाहन चालकों, पैदल राहगीरों, स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को मुश्किलों से गुजरना पड़ा।
सबसे गंभीर स्थिति हल्लोमाजरा के पोस्ट ऑफिस रोड पर सामने आई, जहां बारिश के पानी के साथ सीवरेज का गंदा पानी सड़क पर ओवरफ्लो होने लगा। सड़क पर जमा गंदे पानी ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक हालात इतने खराब हो गए कि सड़क से होकर ऑफिस, स्कूल और कॉलेज जाना तक मुश्किल हो गया।
पोस्ट ऑफिस रोड पर बारिश और सीवरेज का पानी मिल जाने से पूरी सड़क पर गंदा पानी जमा हो गया। कई जगह पानी इतना अधिक था कि दोपहिया वाहन और छोटे वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए। वाहन चालकों को अपने वाहनों को पानी से निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जमा पानी केवल बारिश का पानी नहीं है, बल्कि इसमें सीवरेज का पानी भी मिल रहा है। इससे बदबू और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों को मजबूरी में इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
जलभराव की समस्या केवल सड़कों तक सीमित नहीं रही। स्थानीय लोगों के अनुसार कई घरों में भी पानी घुस गया। इससे घरों में रखा सामान खराब होने की शिकायत सामने आई है। लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान उन्हें अपना घरेलू सामान बचाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी।
बारिश रुकने के बाद भी जलभराव लंबे समय तक बना रहने से लोगों में नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी दिखाई दी।
नई स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन के बावजूद समस्या बरकरार
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस समस्या के समाधान के लिए नई स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद हालात में सुधार क्यों नहीं हुआ? स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद उम्मीद थी कि बारिश के दौरान पानी की निकासी बेहतर होगी, लेकिन तेज बारिश ने व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी।
लोगों का आरोप है कि यदि नई पाइपलाइन के बावजूद बारिश का पानी और सीवरेज सड़क पर जमा हो रहा है तो कहीं न कहीं ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता, सफाई, कनेक्टिविटी या रखरखाव में गंभीर खामी है।
करोड़ों का बजट, फिर भी जलभराव क्यों?
बारिश के बाद शहर में सामने आए जलभराव ने नगर निगम और प्रशासन के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें मानसून से पहले रोड गलियों की सफाई, सीवरेज और बरसाती पानी की निकासी की तैयारियां पूरी होने की बात कही जाती है।
हर साल मानसून से पहले नालों, रोड गलियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद पहली तेज बारिश में यदि सड़कें तालाब में तब्दील हो जाएं और सीवरेज का पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह पैसा जमीन पर कितना काम कर रहा है।
कागजों में सफाई, जमीन पर जलभराव!
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से नालों और रोड गलियों की सफाई के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान जब पानी की निकासी नहीं होती तो इन दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है।
लोगों का कहना है कि यदि रोड गलियों और बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था की नियमित सफाई और निगरानी होती तो बारिश के साथ सीवरेज का पानी सड़क पर आने जैसी स्थिति नहीं बनती।
वाहन चालकों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी
सड़कों पर पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों को सड़क की गहराई और गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पा रहा था। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी खतरनाक रही। कई वाहन पानी में बंद हो गए, जबकि राहगीरों को कपड़े और सामान बचाते हुए गंदे पानी से निकलना पड़ा।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों तथा नौकरी के लिए निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भारी बारिश के दौरान यही स्थिति बनी रहती है तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
हल्लोमाजरा के लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से सवाल किया है कि—
नई स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन के बावजूद पानी की निकासी क्यों नहीं हुई?
सीवरेज का पानी बारिश के पानी के साथ सड़क पर क्यों आ रहा है?
मानसून से पहले रोड गलियों और ड्रेनेज की सफाई कितनी हुई?
जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
घरों में पानी घुसने से हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
लोगों की मांग है कि नगर निगम और प्रशासन केवल बारिश के बाद पानी निकालने तक सीमित न रहें, बल्कि जलभराव के मूल कारण की पहचान कर स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही जहां नई पाइपलाइन बिछाई गई है, उसकी क्षमता और कनेक्शन की भी जांच कराई जाए।
बारिश ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि कागजों पर की गई तैयारियों और जमीन पर मौजूद व्यवस्था में कितना अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जलभराव को महज एक दिन की परेशानी मानकर भूल जाता है या फिर भविष्य के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था करता है।
