चंडीगढ़ में 3 महीने तक पुलिस को चकमा देता रहा गैंगस्टर, आखिरकार दिल्ली पुलिस ने किया काबू
चंडीगढ़। शहर में गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने के बड़े-बड़े दावों के बीच चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस का वांटेड गैंगस्टर विकास दहिया उर्फ सोनू उर्फ ठेकेदार करीब तीन महीने तक सेक्टर-38 में किराये के मकान में पहचान बदलकर रहता रहा, लेकिन शहर की किसी भी यूनिट को इसकी भनक तक नहीं लग सकी।
आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। गैंगस्टर पिछले करीब नौ महीनों से फरार चल रहा था और कई राज्यों की पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। चंडीगढ़ पुलिस के पास आपरेशन सेल, क्राइम ब्रांच, डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल जैसी कई विशेष यूनिट्स हैं।
इसके अलावा शहर में 16 थाने और कई पुलिस चौकियां भी सक्रिय हैं। हाल ही में गैंगस्टर गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ऑपरेशन सेल में दो विशेष इंस्पेक्टरों की तैनाती भी की गई थी। इसके बावजूद एक वांटेड गैंगस्टर का इतने लंबे समय तक शहर में छिपे रहना पुलिस के खुफिया नेटवर्क और निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता को उजागर करता है।
सूत्रों के मुताबिक विकास दहिया न सिर्फ चंडीगढ़ में छिपकर रह रहा था, बल्कि इस दौरान कथित तौर पर अवैध शराब के कारोबार में भी सक्रिय था। बताया जा रहा है कि वह यहां से शराब की तस्करी कर उसे अन्य राज्यों, खासकर गुजरात तक पहुंचा रहा था। अगर यह तथ्य जांच में सही साबित होता है, तो यह न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि इंटर-स्टेट अपराध नेटवर्क को लेकर भी गंभीर चिंता का विषय है।
गैंगस्टर 42 वर्षीय विकास दहिया हरियाणा के सोनीपत जिले के खरखौदा का रहने वाला है। वह दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में कई संगीन मामलों में वांटेड रहा है। वर्ष 2010 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी।
जमानत पर बाहर आने के बाद जुलाई 2025 में दिल्ली के सुराखपुर निवासी नेशनल लेवल गोल्ड मेडलिस्ट बाॅक्सर विकास डागर उर्फ भिंडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 30 जुलाई 2025 की इस वारदात के बाद से फरार हो गया।
18 अक्टूबर 2025 को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया। उसके साथ इस हत्याकांड में सुमित राणा उर्फ छोटू और कृष्ण दहिया उर्फ महाराज भी शामिल थे, जो अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पिछले नौ महीनों से विकास की तलाश कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को उसकी प्रेमिका के बारे में अहम जानकारी मिली, जो उसके फरार होने के बाद चंडीगढ़ में आकर रहने लगी थी। इसी इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम चंडीगढ़ पहुंची और कई दिनों तक गुप्त रूप से रेकी की।
तकनीकी सर्विलांस और मानव खुफिया तंत्र की मदद से आरोपित की लोकेशन ट्रेस की गई। विकास ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग नाम से किराये का मकान लिया था और अपनी प्रेमिका से भी दूरी बनाकर रखी थी।
उसकी पहचान बाईं आंख के नीचे कट के निशान से पुख्ता की गई। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने पुख्ता जानकारी के बाद सेक्टर-38 में दबिश देकर विकास दहिया को गिरफ्तार कर लिया और उसे दिल्ली ले जाया गया। पुलिस उसके एक अन्य साथी को जीरकपुर से पकड़ने की तैयारी में थी, लेकिन उसे भनक लग गई और वह फरार हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने चंडीगढ़ पुलिस के इंटेलिजेंस नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां शहर में गैंगस्टर गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। दूसरी ओर एक वांटेड अपराधी का महीनों तक बेखौफ रहना सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।
