चंडीगढ़ : सेक्टर-49 निवासी और शहर में “झाड़ू योद्धा” के नाम से प्रसिद्ध इंदरजीत सिंह सिद्धू ने स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान प्राप्त किया है. मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ये सम्मान प्रदान किया.
झाड़ू योद्धा के नाम से मशहूर : सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ को स्वच्छ और सुंदर बनाने के अभियान से जुड़े हुए हैं. पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए खुद झाड़ू उठाकर लोगों को जागरूक करना शुरू किया. उनके इसी प्रयास के चलते लोग उन्हें प्यार से “झाड़ू योद्धा” के नाम से जानते हैं. सिद्धू ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक किया और समाज को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया. उनके कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है.
इंदरजीत सिंह सिद्धू के राष्ट्रपति भवन में सम्मान प्राप्त करने के बाद चंडीगढ़ में खुशी का माहौल है. शहर के लोगों ने उनकी इस उपलब्धि को चंडीगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया है. स्वच्छता के क्षेत्र में उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है.
इंदरजीत सिंह सिद्धू मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के धुरी तहसील के बूगरा गांव के रहने वाले हैं. वे पंजाब पुलिस के रिटायर्ड डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) हैं. उनकी उम्र करीब 88 वर्ष है. वे 1964 बैच के IPS अधिकारी थे, जो 1996 में रिटायर हुए थे. 1986 में उन्होंने अमृतसर में सिटी SP के रूप में अहम जिम्मेदारियां निभाईं. 1987 में वो चंडीगढ़ आए और DIG CID के पद पर नियुक्त हुए थे. 1996 में रिटायरमेंट के बाद वो अपनी पत्नी देविंदर पाल कौर के साथ सेक्टर 49 की IAS-IPS सोसाइटी में रहने लगे. 2023 में उनकी पत्नी का निधन हो गया, जिसके बाद वह अकेले ही सैर करते और सफाई कार्य में जुटे रहते. पिछले 10 से ज्यादा वर्षों से वे सैनिटेशन कार्ट लेकर हर दिन सुबह 6 बजे शहर की सड़कें और नालियां साफ करते हैं.
शहर से कूड़ा उठाने का उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसे आनंद महिंद्रा ने भी शेयर किया था जिसके बाद इंदरजीत सिंह सिद्धू खासी चर्चा में आ गए थे. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने उनके वीडियो को शेयर करते हुए लिखा था कि ” चंडीगढ़ के श्री इंदर जीत सिंह सिद्धू हर सुबह 6 बजे, चंडीगढ़ के सेक्टर 49 की शांत गलियों में, अपने सेवा कार्य की शुरुआत करते हैं. सिर्फ एक साइकिल ठेला और कर्तव्य की अटूट भावना के साथ, वे धीरे-धीरे और लगन से सड़क किनारे से कूड़ा उठाते हैं. वे कहते हैं कि स्वच्छ सर्वेक्षण सूची में चंडीगढ़ को मिली ‘नीची रैंकिंग’ से वे खुश नहीं थे. लेकिन शिकायत करने के बजाय, उन्होंने काम करना चुना. उनके द्वारा उठाया गया हर कूड़ा सिर्फ कूड़ा हटाना नहीं है. ये एक संदेश है. एक बेहतर दुनिया में उनका शांत, दृढ़ विश्वास. उम्र या पहचान की परवाह किए बिना, सार्थक जीवन जीने में विश्वास. युवाओं और गति के प्रति जुनूनी दुनिया में, उनके धीमे लेकिन स्थिर कदम हमें बताते हैं कि उद्देश्य कभी सेवानिवृत्त नहीं होता. सेवा की कोई उम्र नहीं होती. सड़कों के इस शांत योद्धा को सलाम.