CJP प्रदर्शन पर बोले दिलजीत दोसांझ; छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया गलत
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अब पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने छात्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि उनके साथ जो हुआ, वह गलत था। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बोलने के बाद उन्हें एक बार फिर ‘देशद्रोही’ कहा जा सकता है।
यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, नीट गड़बड़ियों और अन्य मांगों को लेकर किया गया था। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक इस समय सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि छात्रों की मांगों को सुना जाए। उन्होंने लिखा, “आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं प्रशासन से अनुरोध करता हूं कि उनकी मांगों को सुना जाए। जनता की आवाज ही भगवान की आवाज होती है।”
मुझे फिर देशद्रोही कहा जाएगा
अपने पोस्ट में दिलजीत ने कहा कि उन्हें पहले भी कई बार ‘देशद्रोही’ (Anti-National) कहा जा चुका है और इस बार भी ऐसा ही होगा। उन्होंने लिखा कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों का समर्थन करने की वजह से उन्हें काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर वह आज भी खुलकर बात नहीं कर सकते। आखिर में उन्होंने लिखा, “बाकी सब भगवान देख रहा है, बाबा सबका भला करे।”
सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च में हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी शामिल हुए। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कई जगह बैरिकेड पार करने की कोशिश की।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी दिखाई दी।
प्रदर्शन के दौरान CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। इसमें तीन प्रमुख मांगें रखी गई
- सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल से रिहा किया जाए।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
- नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन मांगों पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया। हालांकि प्रदर्शन खत्म करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।
