चंडीगढ़ के स. इंदरजीत सिंह सिद्धू को 23 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रदान करेंगी पद्म श्री सम्मान

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झाड़ू योद्धा’ के नाम से मशहूर पूर्व IPS अधिकारी ने तीन दशक से अधिक समय से स्वच्छता अभियान को बनाया जीवन मिशन

चंडीगढ़ निवासी स. इंदरजीत सिंह सिद्धू को 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
स. इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब पुलिस के सेवानिवृत्त उप महानिरीक्षक (डीआईजी) और पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें स्वच्छता के प्रति उनके असाधारण समर्पण के कारण देशभर में ‘झाड़ू योद्धा’ के नाम से पहचान मिली है। उन्होंने बिना किसी प्रचार के वर्षों तक सार्वजनिक स्थानों की सफाई और संरक्षण का बीड़ा उठाया।
6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले के गागरपुर गांव में जन्मे सिद्धू ने अनुशासन, ईमानदारी और जनसेवा को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने संगरूर के गवर्नमेंट रणबीर कॉलेज से बीए की शिक्षा प्राप्त की और महिंद्रा कॉलेज, पटियाला से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। कॉलेज जीवन में वह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी रहे। मुक्केबाजी में उन्होंने कॉलेज कलर अवार्ड जीता और पंजाब के विश्वविद्यालयों के बीच खेल उपलब्धियों के लिए दो बार रोल ऑफ ऑनर में स्थान बनाया। एनसीसी गतिविधियों के दौरान भी उनकी रुचि समाज सेवा और स्वच्छता कार्यों में रही।
सिद्धू वर्ष 1963 में पंजाब पुलिस में निरीक्षक के पद पर भर्ती हुए। वर्ष 1981 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति मिली। अपने लंबे और गौरवपूर्ण पुलिस करियर के दौरान उन्होंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, नई दिल्ली और कोलकाता में सेवाएं दीं। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने सांबा सेक्टर में भी जिम्मेदारी निभाई। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 1991 में उन्हें सराहनीय सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। वर्ष 1996 में वह चंडीगढ़ से पंजाब के डीआईजी (आसूचना) पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद भी सिद्धू ने समाज सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। चंडीगढ़ में सुबह की सैर के दौरान उन्होंने पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर फैली गंदगी को देखा और खुद सफाई करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या से बढ़कर जीवन का उद्देश्य बन गया।
पिछले करीब तीन दशकों से सिद्धू लगातार चंडीगढ़ के पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई करते आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को सुधार के लिए पत्र लिखे, सफाई कर्मचारियों को प्रेरित किया और लोगों में नागरिक जिम्मेदारी की भावना जगाने का प्रयास किया।
स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने से पहले ही सिद्धू व्यक्तिगत प्रयासों के माध्यम से स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश दे रहे थे। बढ़ती उम्र के बावजूद उनका सेवा भाव आज भी जारी है। उनका जीवन अनुशासन, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा की मिसाल बन गया है।
पद्म श्री सम्मान उनके इसी अद्वितीय योगदान और समाज के प्रति समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान है।

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