पंचकूला बच्ची से रेप मामला, दोषी को 20 साल की सजा, 50 हजार रुपये का जुर्माना

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पंचकूला: फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ की अदालत ने वर्ष 2021 के एक पॉक्सो मामले में दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है. इसके अलावा दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी अदायगी नहीं करने की सूरत में सजा की अवधि बढ़ाई जाएगी.

कोर्ट ने इन धाराओं के तहत दोषी पाया: अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत दोषी पाते हुए ये कड़ी सजा सुनाई है. जिला पंचकूला पुलिस विभाग द्वारा कहा गया कि ये फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि मासूमों की अस्मत से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है.

उत्तर प्रदेश का रहने वाला है दोषी: ये मामला 13 दिसंबर 2021 को उस समय सामने आया था, जब पीड़िता की मां पंचकूला महिला थाना में पहुंची थी. उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि 12 दिसंबर को एक परिचित व्यक्ति उनकी 14 वर्षीय बेटी को किसी रिश्तेदार से मिलवाने के बहाने पंचकूला के ही एक सुनसान स्थान पर ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया. शिकायत के आधार पर महिला थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरु की गई. उस समय पंचकूला के महिला थाना में तैनात महिला पीएसआई प्रिया के नेतृत्व में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी आरोपी को 14 अप्रैल को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया था.

‘बेटियों की सुरक्षा अटूट संकल्प’: डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा कि “पुलिस के लिए बेटियों की सुरक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक अटूट संकल्प है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता. अपराधियों के लिए जेल ही एकमात्र ठिकाना है. इस केस की जांच के दौरान हर वैज्ञानिक और तकनीकी पहलू को बारीकी से परखा गया, ताकि न्याय मिलने में कोई कमी न रह जाए. कोर्ट का यह फैसला पुलिस की कड़ी मेहनत और न्यायपालिका की संवेदनशीलता का प्रमाण है. पंचकूला पुलिस महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है.”

‘अपराधियों के मन में डर जरूरी’: कोर्ट के इस फैसले पर पंचकूला पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज ने कहा कि “समाज में अपराधियों के मन में डर होना चाहिए, आम जनता के मन में नहीं. पॉक्सो एक्ट के तहत दी गई यह सजा उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो मासूमों को अपना शिकार बनाने की सोचते हैं. पंचकूला पुलिस की प्रभावी पैरवी और त्वरित जांच ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय मिलने में देरी न हो. जिले में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम जारी है.”

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