ग्रीन पटाखे कितने सुरक्षित? जानें इनके फायदे, नुकसान और इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी सावधानियां
दिवाली पर आतिशबाजी का शौक है, लेकिन प्रदूषण को लेकर भी चिंता है? ऐसे में ग्रीन पटाखे एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आए हैं। इन्हें पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि ये पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं। इनसे भी धुआं, महीन कण और शोर पैदा होता है। अमृतसर और दिल्ली में दिवाली के दौरान हुए अध्ययनों में आतिशबाजी के समय प्रदूषण का स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं। ये अध्ययन प्रमाणित ग्रीन पटाखों के प्रभाव को अलग से नहीं मापते। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ग्रीन पटाखे कैसे अलग हैं, इनके क्या फायदे हैं और इन्हें खरीदते तथा जलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. ग्रीन पटाखे क्या हैं और पारंपरिक पटाखों से कैसे अलग हैं ?
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इनकी रासायनिक संरचना में बदलाव किए जाते हैं, ताकि धुएं और हानिकारक उत्सर्जन को कम किया जा सके।
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तहत राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों के लिए मानक तय किए हैं। इनमें स्वास (सेफ वाटर रिलीजर), स्टार (सेफ थर्माइट क्रैकर) और सफल (सेफ मिनिमल एल्युमिनियम) जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर रोक है।
2. ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कितना कम होता है ?
नीरी के मानकों के अनुसार, ग्रीन पटाखों को संबंधित पारंपरिक पटाखे की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का उत्सर्जन कम से कम 30 प्रतिशत घटाना होता है। दूसरा विकल्प यह है कि पीएम उत्सर्जन में कम से कम 20 प्रतिशत और सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) के उत्सर्जन में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी हो।
अलग-अलग उत्पादों का प्रदर्शन अलग हो सकता है। एक अध्ययन में कुछ ग्रीन पटाखों से निकलने वाले पीएम10 और पीएम2.5 में बेरियम की मात्रा पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 से 60 प्रतिशत तक कम पाई गई। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि शहर के स्तर पर प्रदूषण भी उतना ही कम हो जाएगा।
3. क्या ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं ?
नहीं। ग्रीन पटाखे भी जलने पर हवा में सूक्ष्म कण और गैसें छोड़ते हैं। दिल्ली में हुए एक अध्ययन में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल के दौरान अल्ट्राफाइन कणों की मौजूदगी देखी गई। ऐसे कणों का आकार और रासायनिक संरचना भी स्वास्थ्य पर उनके असर को तय करती है।
इसलिए ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने का विकल्प हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं माना जा सकता।
4. क्या ग्रीन पटाखों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से भी पीएम2.5 और पीएम10 बढ़ सकते हैं?
हां। दिवाली पर कम समय में बड़ी संख्या में पटाखे जलाए जाते हैं। इससे हवा में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे कणों की मात्रा बढ़ सकती है। पीएम2.5 के कण बेहद छोटे होते हैं और सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। पीएम10 में 10 माइक्रोमीटर या इससे छोटे कण शामिल होते हैं।
अमृतसर में दिवाली 2022 के दौरान पीएम2.5 का स्तर 182 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो भारत के 24 घंटे के मानक 60 माइक्रोग्राम से करीब तीन गुना था। एक अन्य अध्ययन में आतिशबाजी के दौरान दिल्ली में पीएम2.5 का स्तर सामान्य समय के मुकाबले लगभग 16 गुना तक बढ़ने की बात सामने आई थी। ये अध्ययन दिवाली के दौरान आतिशबाजी से जुड़े प्रदूषण को दर्शाते हैं, लेकिन इनके आधार पर प्रदूषण को केवल ग्रीन पटाखों से जोड़ना सही नहीं होगा।
5. ग्रीन पटाखों से स्वास्थ्य को क्या खतरे हो सकते हैं ?
ग्रीन पटाखों से प्रदूषण अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन इनके धुएं और महीन कणों से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बने रहते हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आईआईटी गुवाहाटी के 2015 के एक अध्ययन में दिवाली के दौरान पीएम10 का स्तर 311 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो सामान्य स्तर से 81 प्रतिशत अधिक था। अध्ययन में आतिशबाजी के दौरान सांस संबंधी शिकायतों के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या और भर्ती होने के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई थी।
इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से पहले का है। इसलिए इसके निष्कर्षों को सीधे ग्रीन पटाखों से जोड़ना सही नहीं होगा। हालांकि, यह आतिशबाजी के दौरान वायु प्रदूषण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को जरूर रेखांकित करता है।
पटाखों के धुएं से आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी और गले में तकलीफ हो सकती है। पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
6. क्या पटाखों से वायु प्रदूषण के अलावा भी नुकसान होता है ?
हां। पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। तेज आवाज से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशानी हो सकती है। पालतू और आवारा जानवर भी तेज आवाज से डरते हैं।
इसके अलावा पटाखों के अवशेष सड़कों और खुले स्थानों पर कचरा फैलाते हैं। इनमें धातुओं के अंश भी हो सकते हैं, जो जमीन पर जमा हो सकते हैं। लापरवाही से पटाखे जलाने पर आग लगने और जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
7. क्या ग्रीन पटाखे ध्वनि प्रदूषण भी कम करते हैं ?
ग्रीन पटाखों का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण कम करना है। इन्हें पूरी तरह शांत या आवाज रहित नहीं माना जा सकता। पटाखों के लिए ध्वनि संबंधी मानक अलग से निर्धारित हैं।
पर्यावरण (संरक्षण) नियमों के तहत पटाखों के लिए चार मीटर की दूरी पर अधिकतम 125 डेसिबल (एआई) या 145 डेसिबल (सी) पीक की सीमा निर्धारित है। यह उत्पाद के लिए तय मानक है, जबकि किसी क्षेत्र में वातावरण के शोर का स्तर अलग तरीके से मापा जाता है।
8. ग्रीन पटाखे बनाने की अनुमति किन्हें है ?
ग्रीन पटाखों का निर्माण निर्धारित मानकों और नियामकीय मंजूरी के तहत ही किया जा सकता है। निर्माताओं को नीरी से पंजीकरण और पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से जरूरी लाइसेंस लेना होता है।
नीरी की अक्तूबर 2025 की जानकारी के अनुसार, 1,403 निर्माता पंजीकृत थे। उत्पादों पर क्यूआर कोड निर्माता तैयार करते हैं, जबकि नीरी पंजीकरण पत्र जारी करता है। पंजीकरण और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी की जांच करना जरूरी है।
9. असली ग्रीन पटाखे की पहचान कैसे करें ?
खरीदारी करते समय पैकेट पर सीएसआईआर-नीरी का प्रमाणन और क्यूआर कोड जरूर देखें। क्यूआर कोड स्कैन करने पर उत्पाद और निर्माता से जुड़ी नियामकीय जानकारी मिल सकती है। नीरी पंजीकरण और पीईएसओ लाइसेंस का विवरण भी जांचें।
सिर्फ पैकेट पर ‘ग्रीन’ या ‘इको फ्रेंडली’ लिखा होना प्रमाणन का सबूत नहीं है। पटाखे केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खरीदें।
10. पटाखे जलाते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें ?
पटाखे खुले स्थान पर और इमारतों, वाहनों, पेड़ों तथा ज्वलनशील वस्तुओं से दूर जलाएं। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। उन्हें वयस्कों की निगरानी में ही आतिशबाजी करने दें।
जो पटाखा नहीं जला हो, उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें। आसपास पानी या अग्निशमन यंत्र रखें। बंद कमरे या संकरी जगह में पटाखे न जलाएं। जले हुए पटाखों के अवशेष ठंडे होने के बाद ही सुरक्षित तरीके से हटाएं। सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को धुएं से दूर रहना चाहिए।
11. चंडीगढ़ में दिवाली 2026 पर पटाखों को लेकर क्या नियम हैं ?
चंडीगढ़ प्रशासन के 27 अक्तूबर 2026 के आदेश के अनुसार शहर में केवल सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति है।
दिवाली पर आतिशबाजी का समय
रविवार, 8 नवंबर 2026
गुरुपर्व पर आतिशबाजी
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सुबह 4 से 5 बजे
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रात 9 से 10 बजे
गुरुपर्व की 24 नवंबर 2026 की तारीख की अंतिम पुष्टि प्रशासन के आदेश से की जानी चाहिए।
अन्य पाबंदियां
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पटाखों की लड़ियां जलाने पर प्रतिबंध।
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केवल लाइसेंसधारी विक्रेता ही पटाखे बेच सकेंगे।
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ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री प्रतिबंधित।
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अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, शिक्षण संस्थानों, अदालतों और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में आतिशबाजी प्रतिबंधित।
96 लाइसेंस, 13 बिक्री स्थल
चंडीगढ़ में पटाखों की बिक्री के लिए 96 अस्थायी लाइसेंस आवंटित किए गए हैं। 14 सितंबर 2026 को सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में ड्रॉ के माध्यम से लाइसेंस आवंटित किए गए।
बिक्री के लिए निर्धारित 13 स्थानों में सेक्टर-43, मनीमाजरा, सेक्टर-46, रामदरबार, सेक्टर-49, सेक्टर-24, सेक्टर-33-सी, सेक्टर-37-सी, सेक्टर-29, सेक्टर-28, सेक्टर-30, सेक्टर-40 और धनास शामिल हैं।
इन स्थानों पर कुल 96 स्टॉल निर्धारित किए गए हैं। बिक्री की अंतिम तारीखें प्रशासन की लाइसेंस सूची से सत्यापित की जानी चाहिए।
12. प्रशासन कैसे सुनिश्चित कर सकता है कि केवल अधिकृत ग्रीन पटाखे ही बिकें और इस्तेमाल हों?
इसके लिए निर्माण से लेकर बिक्री तक निगरानी जरूरी है। प्रशासन को पंजीकृत निर्माताओं और पीईएसओ लाइसेंस की जांच करनी चाहिए। बाजार में उपलब्ध उत्पादों के क्यूआर कोड और पैकेट पर दर्ज जानकारी का मिलान किया जाना चाहिए।
बिक्री स्थलों पर नियमित निरीक्षण, बिना लाइसेंस पटाखे बेचने वालों पर कार्रवाई और प्रतिबंधित उत्पादों की जब्ती जरूरी है। पुलिस और संबंधित विभागों को तय समय तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में पटाखे जलाने पर भी नजर रखनी होगी। नागरिकों की जिम्मेदारी भी अहम है। उन्हें केवल प्रमाणित पटाखे खरीदने और नियमों का पालन करने की जरूरत है।
