चंडीगढ़ से बड़ी खबर: ₹10 करोड़ घोटाले में पूर्व अधिकारी पर केस मंजूर

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देश के चर्चित 13 साल पुराने रेलवे घोटाले में एक अहम मोड़ सामने आया है। पूर्व रेलवे बोर्ड सदस्य महेश कुमार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा चलाने का रास्ता अब साफ हो गया है। चंडीगढ़ की अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को रेल मंत्रालय से अभियोजन की मंजूरी मिल चुकी है। यह मामला साल 2013 में सामने आए 10 करोड़ रुपये के रिश्वत कांड से जुड़ा है, जिसमें कई बड़े नाम शामिल थे।

ईडी ने महेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए रेल मंत्रालय से अनुमति मांगी थी, जिसके बाद 5 मार्च 2026 को मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी द्वारा सैंक्शन ऑर्डर जारी कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार अब किसी भी सरकारी अधिकारी पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलाने से पहले संबंधित विभाग की मंजूरी जरूरी होती है।

इस घोटाले का खुलासा साल 2013 में सीबीआई की छापेमारी के दौरान हुआ था। जांच में सामने आया था कि रेलवे बोर्ड में ऊंचे पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर 10 करोड़ रुपये की रिश्वत का सौदा किया जा रहा था। इस मामले में महेश कुमार के साथ-साथ पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, महेश कुमार का संपर्क जीजी ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी नारायण राव मंजूनाथ से था और वे रेलवे बोर्ड में सदस्य (इलेक्ट्रिकल) बनने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने पंचकूला के कारोबारी संदीप गोयल से संपर्क किया था। संदीप गोयल ने मंत्रालय में अपनी पहुंच का दावा करते हुए नियुक्ति कराने का भरोसा दिया था। इस पूरी साजिश में विजय सिंगला और अजय गर्ग की भी अहम भूमिका बताई गई है।

सीबीआई की जांच के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अलग जांच शुरू की थी। साल 2020 में ईडी ने चंडीगढ़ स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में महेश कुमार और विजय सिंगला समेत 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन उस समय महेश कुमार के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं ली गई थी।

इस मामले में महेश कुमार, नारायण राव मंजूनाथ, संदीप गोयल, विजय सिंगला, अजय गर्ग, राहुल यादव, समीर संधीर, सुशील डागा, सीवी वेणुगोपाल और एमवी मुरली कृष्ण समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज है।

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