1 जून से बदले ये 5 बड़े नियम! LPG से UPI तक, जानें आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ेगा कितना असर
जून महीने की शुरुआत के साथ देशभर में कई बड़े नियम बदल गए हैं. इन बदलावों का असर सीधे आम लोगों की जेब, बैंकिंग, गैस सिलेंडर, डिजिटल पेमेंट, सोलर पैनल और गाड़ियों की कीमतों पर पड़ सकता है. ऐसे में अगर आप बैंकिंग, गैस बुकिंग, ऑनलाइन पेमेंट या कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो नए नियमों को जानना जरूरी है.
हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं. 1 जून से कमर्शियल गैस सिलेंडर और छोटू गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया गया है, जबकि घरेलू सिलेंडर के रेट पर भी सभी की नजर बनी हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर एलपीजी की कीमतों पर पड़ रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में घरेलू उपभोक्ताओं पर भी असर दिख सकता है.
डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए जून से कुछ नए बदलाव लागू किए गए हैं. अब कई UPI ट्रांजैक्शन में पैसे भेजने से पहले सामने वाले व्यक्ति का बैंक में दर्ज नाम दिखेगा, जिससे गलत ट्रांसफर और फ्रॉड के मामलों को कम किया जा सके. इसका मकसद गलत अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होने और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों को कम करना है. इससे यूजर्स को पेमेंट करते समय ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.
सरकार लगातार आधार कार्ड और पैन कार्ड को लिंक कराने पर जोर दे रही है. जिन लोगों ने अभी तक दोनों दस्तावेज लिंक नहीं किए हैं, उन्हें बैंकिंग और टैक्स से जुड़े कामों में परेशानी हो सकती है. कई वित्तीय सेवाओं में पैन की वैधता जरूरी होती है. ऐसे में अगर लिंकिंग पूरी नहीं है तो कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.
बैंकिंग सेक्टर में भी जून से कुछ बदलाव लागू हुए हैं. कुछ बैंकों ने कैश डिपॉजिट और छोटे नोटों की जमा सीमा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. इसके अलावा ग्राहकों को बैंकिंग शुल्क और सर्विस चार्ज से जुड़े अपडेट पर भी नजर रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि अलग-अलग बैंक समय-समय पर अपने नियम अपडेट करते रहते हैं.
अगर आपका खाता HDFC बैंक में है तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण है। बैंक ने छोटे नोट और सिक्कों के कैश डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. अब 20 रुपये या उससे कम मूल्य के नोटों की जमा सीमा 10,000 रुपये प्रति माह तय की गई है. वहीं सिक्के जमा करने की सीमा 5,000 रुपये प्रति माह होगी, इससे ज्यादा जमा करने पर ऊपर से 2 फीसदी शुल्क देना पड़ सकता है.
अगर आप घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण है. सरकार ने साफ किया है कि सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स में केवल Approved Model and Manufacturer List में शामिल कंपनियों के सोलर मॉड्यूल और सेल का ही इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे गुणवत्ता बेहतर होगी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, इससे कुछ प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने की भी आशंका है.
जून की शुरुआत के साथ कार खरीदने वालों को भी झटका लगा है. कई ऑटो कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ा दी हैं. मारुति सुजुकी ने अपनी कई कारों की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है तो वहीं, हुंडई मोटर इंडिया ने भी अलग-अलग मॉडलों की कीमतें बढ़ाने का ऐलान किया है. ऐसे में नई कार खरीदने वालों को पहले के मुकाबले ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है.
पेट्रोल-डीजल और ईंधन बाजार पर भी नजर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर भी लोगों की चिंता बनी हुई है. 1 जून से पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) से जुड़े कुछ नए शुल्क भी लागू हो गए हैं. इसके तहत पेट्रोल पर 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लागू किया गया है. तेल कंपनियां लगातार बाजार की समीक्षा कर रही हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है.
रिकांग पिओ, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश में शिपकी-ला दर्रे से 1 जून से भारत-चीन बॉर्डर ट्रेड फिर से शुरू होगा. 20 आइटम ऐसे हैं जिन्हें आयात किया जा सकता है और लगभग 36 आइटम ऐसे हैं जिन्हें निर्यात किया जा सकता है.
जून महीने की शुरुआत के साथ गैस, बैंकिंग, कार, ईंधन और सोलर सेक्टर से जुड़े बदलाव सीधे लोगों की जेब पर असर डाल सकते हैं. ऐसे में अगर आप गैस सिलेंडर बुक कराने, कार खरीदने, बैंक में कैश जमा करने या सोलर पैनल लगवाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो नए नियमों की जानकारी पहले से रखना जरूरी है. इससे आपको बाद में किसी तरह की परेशानी या खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा.
