स्वाइन फ्लू को लेकर हरियाणा में अलर्ट, बुजुर्गों और बच्चों के लिए एडवाइजरी जारी
हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉक्टर सुमिता मिश्रा ने राज्य में मौसमी इन्फ्लुएंजा (फ्लू) की स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताते हुए नागरिकों से इससे ना घबराने की अपील की है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग राज्य भर में कड़ी निगरानी रख रहा है और सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को समय पर जांच और इलाज के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.
स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं: डॉक्टर मिश्रा ने लोगों को आम मौसमी फ्लू और ‘स्वाइन फ्लू’ (H1N1) के बीच का अंतर समझाते हुए स्पष्ट किया कि H1N1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का ही एक हिस्सा है, जिसे नियमित स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली के तहत ट्रैक और इलाज किया जाता है. वर्ष 2009 के दौरान इस वायरस के मूल स्रोत के कारण इसे ‘स्वाइन फ्लू’ कहा गया था, लेकिन अब यह इंसानों के बीच फैलने वाले सामान्य वायरस का ही रूप ले चुका है, इसलिए इस नाम से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है.
स्वाइन फ्लू के लक्षण: डॉक्टर सुमिता मिश्रा ने इन्फ्लुएंजा के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह सांस से जुड़ा एक तीव्र संक्रमण है, जिसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर और सिर में दर्द, ठंड लगना तथा थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कुछ मामलों में, विशेषकर बच्चों में, उल्टी और दस्त जैसी पेट की समस्याएं भी हो सकती हैं. यद्यपि अधिकांश मामलों में यह संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है, फिर भी उच्च जोखिम वाले समूहों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए.
डॉक्टर सुमिता मिश्रा ने 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, 5 वर्ष से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सांस या दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अधिक सावधान रहने की सलाह दी है. सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने पर बिना किसी देरी के डॉक्टरी सलाह लेने का आग्रह किया गया है.
रोकथाम के उपाय: अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि “नागरिक बुनियादी सावधानियां अपनाकर इस संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं. लोग भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें, साबुन और पानी या सैनिटाइज़र से बार-बार हाथ धोएं, आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें तथा खांसते या छींकते समय मुंह को रुमाल या टिश्यू से ढकें. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार लेने और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें. लोग बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं ना लें, क्योंकि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है. राज्य भर के अस्पतालों को पर्याप्त बेड, दवाओं और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था के साथ सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं.”
