एसआईटी करेगी प्राण प्रतिष्ठा के बाद हुई नियुक्तियों की जांच, 800 कर्मचारियों का ब्योरा तलब

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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले की प्रशासनिक जांच अब केवल बैंक खातों और नकदी बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य सरकार द्वारा एसआईटी ने अपनी पड़ताल का दायरा बेहद व्यापक कर दिया है। जांच टीम अब कथित चंदा चोरी के साथ-साथ 22 जनवरी 2024 को हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर परिसर के भीतर किए गए बड़े प्रशासनिक निर्णयों, विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों की समीक्षा कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, राम मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए वर्तमान में करीब 800 कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों के पूरे सेवा इतिहास की जांच करने पर एक बड़ा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इनमें से अधिकांश नियुक्तियां बिना किसी समुचित स्क्रीनिंग या कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के सीधे तौर पर कर दी गई थीं।

इन कुल कर्मियों में से लगभग 200 कर्मचारी सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से नियुक्त हैं, जिनमें मुख्य रूप से अकाउंट्स ऑफिस के कर्मी, पुजारियों का दल, सेवा केंद्रों और पास बनाने वाले काउंटर पर तैनात स्टाफ के साथ-साथ यज्ञ स्थल के स्वयंसेवक और वेतनभोगी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, लॉकर व्यवस्था, मुख्य सुरक्षा घेरा, जूता-चप्पल स्टैंड और सफाई व्यवस्था का जिम्मा निजी कंपनियों के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हाथ में है, जिनकी संविदा प्रक्रियाओं की फाइलों को एसआईटी ने बारीकी से खंगालना शुरू कर दिया है।

17 वर्षों से तैनात सुरक्षा कर्मी पर टिकी सुई, पुराने स्टाफ की सूची तलब
जांच का एक बड़ा रणनीतिक सिरा मंदिर परिसर में लंबे समय से जमे हुए अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की ओर भी घूम गया है। एसआईटी ने सुरक्षा और व्यवस्था तंत्र से जुड़े उन सभी कर्मियों का पूरा विवरण और सूची तलब की है जो वर्षों से एक ही कार्यक्षेत्र में तैनात हैं। इसी पड़ताल के दौरान सुरक्षा विभाग के एक ऐसे कर्मचारी का नाम प्रमुखता से प्रकाश में आया है जो पिछले 17 वर्षों से लगातार राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा और आंतरिक गतिविधियों का हिस्सा रहा है।

टीम अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद जब श्रद्धालुओं की आमद और चढ़ावे में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई, तो इन पुराने कर्मियों की तैनाती की अवधि, उनके दैनिक कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों के बदलाव में किस प्रकार की शिथिलता बरती गई और क्या इन्हें वित्तीय गतिविधियों की निगरानी का भी अधिकार मिला हुआ था।

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