चंडीगढ़ : सेक्टर-22 सिविल अस्पताल में 5 घंटे बिजली गुल, गर्मी से बेहाल मरीज; प्रसूताओं को हाथ से पंखा झलने की नौबत
सेक्टर-22 स्थित सिविल अस्पताल में रविवार को करीब पांच घंटे बिजली गुल रहने से मरीजों और तीमारदारों को भीषण गर्मी और उमस में परेशान होना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत डिलीवरी के बाद अस्पताल में भर्ती महिलाओं और उनके नवजात बच्चों को हुई। बिजली न होने के कारण कई महिलाओं को हाथ से पंखा झलना पड़ा, जबकि कुछ नवजात बच्चों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए जमीन पर लेकर बैठना पड़ा।
अस्पताल में सुबह करीब 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस दौरान वार्डों में भर्ती महिलाओं का गर्मी से बुरा हाल रहा। परिजनों ने बताया कि पहले से बिजली कट की जानकारी दिए जाने की बात कही जा रही थी, लेकिन इतने लंबे समय तक बिजली नहीं रहने की स्थिति में अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
अस्पताल के वार्ड नंबर 3 और 4 में करीब 30 महिलाओं की डिलीवरी होने की बात सामने आई है। इनमें कई महिलाओं की डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए हुई थी। ऑपरेशन के बाद महिलाओं को आराम और उचित देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन बिजली गुल होने के कारण उन्हें भीषण गर्मी में रहना पड़ा।
निशा ने बताया कि करीब चार दिन पहले उनका ऑपरेशन से बच्चा हुआ था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद टांकों के कारण पहले ही काफी परेशानी होती है। ऐसे में कई घंटे तक बिजली न होने से गर्मी और उमस में हालत और खराब हो गई।
सेक्टर-38 निवासी प्रियांशी पाल ने बताया कि उनका भी करीब चार दिन पहले ऑपरेशन से बच्चा हुआ है। उन्होंने कहा कि मौसम में पहले से ही काफी गर्मी है और बिजली न होने के कारण अस्पताल में रहना बेहद मुश्किल हो गया। उनके मुताबिक अस्पताल में करीब 40 महिलाओं की डिलीवरी हुई है और बिजली कट के दौरान सभी को परेशानी झेलनी पड़ी।
मरीजों और उनके परिजनों का सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि अगर पहले से पता था कि पांच घंटे का बिजली कट लगेगा तो मरीजों के लिए पंखे और अन्य जरूरी सुविधाएं चलाने के लिए इनवर्टर या जेनरेटर की
परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधा में बिजली की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी है। खासकर प्रसूता महिलाओं और नवजात बच्चों के वार्ड में लंबे समय तक बिजली गुल होना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।
मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में लंबे बिजली कट के दौरान मरीजों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
