अयोध्या राम मंदिर घोटाला: चढ़ावा चोरी में 8 लोगों पर FIR; 4 आरोपी गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में लंबी प्रशासनिक उठा-पटक और गहन जांच के बाद गुरुवार को थाना राम जन्मभूमि में आठ रसूखदार लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है. यह हाई-प्रोफाइल मुकदमा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित तहरीर पर आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया. कानून व्यवस्था से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस संवेदनशील मामले में गठित SIT ने अपनी प्राथमिक गोपनीय रिपोर्ट अपर गृह सचिव संजय प्रसाद को सौंपी थी. शासन स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ इतनी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है.

पुलिस और अफसरों के बयानों में विरोधाभास: हालांकि, इस बड़ी कार्रवाई के बावजूद फिलहाल अयोध्या पुलिस मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से केस दर्ज किए जाने की बात से साफ इनकार कर रही है. ज्ञात हो कि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर चौपाल के आकस्मिक निधन के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए सदस्य बने कृष्ण मोहन की तहरीर को इस मुकदमे का मुख्य आधार बनाया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. इन सभी नामजद आरोपियों के विरुद्ध नए कानूनी प्रावधानों के तहत धारा 306, 316, 317 और 61 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है.

दर्ज की गई ये गंभीर धाराएं मुख्य रूप से मंदिर के धन के गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश रचने से सीधे तौर पर संबंधित हैं. इस मामले में अब तक मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला व लवकुश मिश्रा को गिरफ्तार भी कर लिया है. वहीं, घटना में शामिल अन्य फरार चल रहे नामजद आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई विशेष टीमें बनाई गई हैं. इस पूरे कानूनी घटनाक्रम के संदर्भ में क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की नई एफआईआर दर्ज न होने की बात कही है.

नए ट्रस्टी कृष्ण मोहन का बैकग्राउंड: प्रशासनिक गलियारों में इस विरोधाभास को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जबकि गिरफ्तारियों की पुष्टि अन्य सूत्रों से हो चुकी है. गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य के रूप में 16 सितंबर 2025 को हरदोई जिले के मूल निवासी कृष्ण मोहन को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया था. दरअसल, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि फरवरी 2025 में वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर चौपाल का निधन हुआ था और उनके रिक्त स्थान पर इसी समाज के प्रबुद्ध व्यक्ति का चयन किया जाना था. इसके बाद सभी ट्रस्टी के सामूहिक परामर्श और मैराथन बैठकों के आधार पर हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन के नाम पर सर्वसम्मति से अंतिम मुहर लगाई गई थी.

अकादमिक पृष्ठभूमि की बात करें तो कृष्ण मोहन ने 70 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी (M.Sc) की उच्च शिक्षा प्राप्त की है. इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित आटॉमिक एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) के क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों तक वैज्ञानिक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य किया था. परमाणु ऊर्जा विभाग के बाद इनका चयन भारतीय वन सेवा (IFS) में हुआ, जहां इन्हें प्रशासनिक सेवा के लिए महाराष्ट्र कैडर आवंटित किया गया था. वर्ष 2012 में वन सेवा से ससम्मान सेवानिवृत्त होने के बाद वे देश के विभिन्न सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय हुए और लगभग 6 महीने तक चले गहन मंथन के बाद ही उनका नाम इस प्रतिष्ठित राम मंदिर ट्रस्ट में जोड़ा गया था.

अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार को घेरा: अयोध्या चंदा गबन प्रकरण में मुकदमा दर्ज होने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार और एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक अकाउंट से एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इस पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया. अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!”. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता के बीच अब यह पुख्ता धारणा बन रही है कि पहले एसआईटी के बहाने मामले के सारे मुख्य सबूत साफ कर दिए गए होंगे.

सपा अध्यक्ष के अनुसार जांच के नाम पर पहले यह पूरी तरह से तय कर लिया गया होगा कि किन बड़ी और रसूखदार मछलियों को बचाना है और किसे इस मामले में फंसाना है. उनका कहना है कि इस सुनियोजित बैकग्राउंड वर्क के पूरा होने के बाद ही दिखावे के लिए पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है. पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईटी को शासन स्तर से पहले ही मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करके दे दी गई होगी और उसी के अनुरूप जांच का नाटक किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले की जांच का निष्कर्ष पहले ही तय कर लिया गया था और बाद में उसके अनुसार केवल कानूनी कार्रवाई की औपचारिकता की गई.

SIT की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल: इससे पहले भी अखिलेश यादव राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार सूबे की योगी सरकार पर राजनीतिक रूप से हमलावर रहे हैं. उन्होंने पूर्व में भी एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ऐसी संवेदनशील जांच समितियों का गठन केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह गया है. सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि जो लोग भगवान के दान की राशि को लेकर पूरी ईमानदारी से सवाल उठा रहे हैं, उन्हें ही सरकारी एजेंसियों के जरिए डराने-धमकाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है. अखिलेश यादव ने पूर्व में लखनऊ में आयोजित अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा था कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में असली दोषियों तक पहुंचने के बजाय मामले को भटकाने की कोशिश की जा रही है.

लखनऊ से मॉनिटरिंग होने का दावा: उनका खुला आरोप था कि इस संवेदनशील पूरे मामले की पल-पल की मॉनिटरिंग लखनऊ के उच्च स्तर से की जा रही है और वास्तविक रूप से जिम्मेदार रसूखदार लोगों को बचाने का पुरजोर प्रयास हो रहा है. अब जबकि अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आधिकारिक रूप से एफआईआर दर्ज हो चुकी है और एसआईटी अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप चुकी है, उसके बाद भी सपा प्रमुख ने जांच प्रक्रिया और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. विपक्षी दलों का मानना है कि इस घोटाले के पीछे कई बड़े चेहरे शामिल हैं जिन्हें बचाने के लिए छोटे स्तर के कर्मचारियों और लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है. अखिलेश यादव के इस नए बयान के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा एक बार फिर पूरी तरह से गरमा गया है और भाजपा की ओर से भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है.

सरकार बड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रही: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि एसआईटी का गठन लीपापोती के लिए किया गया था, लेकिन प्रदेश की राज्यपाल को पूरे प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ज्ञापन दिए जाने और व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का असर रहा कि सरकार को भगवान राम मंदिर मे बीजेपी और आरएसएस के लोगों की तरफ से की गई चढ़ावा चोरी मे कार्रवाई करनी पड़ी. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने बार बार ये कहा कि श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन और शिलापूजन के समय प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं से इकट्ठा हुए धन को आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया. राम मंदिर और उससे जुड़े आर्थिक लेने-देन, भूमि की खरीद-फरोख्त और जो चढ़ावे के मामले में सवाल उठ रहे हैं उन सभी सवालों का जवाब जनता को मिलना चाहिए, लेकिन सरकार लगातार दोषियों को बचाने का प्रयास करती रही. आखिरकार कांग्रेस पार्टी की तरफ से चढ़ावा चोरी का व्यापक विरोध करने पर कुछ लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है.

कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि भाजपा और आरएसएस के लोग भ्रष्टाचार कर रहे हैं. पहले इन्होने मंदिर निर्माण में चंदा चोरी किया. अब चढ़ावा में चोरी कर रहे हैं. यह छोटे लोग नहीं हैं, हिस्से के बंटवारे का खेल है. चोरी के मामले में बड़ों को बचाने में छोटे लोगों को मोहरा बनाया जा रहा है. चोरी को दबाने का काम किया जा रहा है. राम मंदिर सेे देश और विदेश के करोड़ों लोगों की जो भावनाएं रही हैं उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है. देश और दुनिया के हिन्दू समाज की भावनाओं को छलने का काम किया गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी चढ़ावा चोरी मामले मे जब तक सभी दोषी पकड़े नहीं जाऐंगे तब तक संघर्ष करती रहेगी.

इधर, एफआईआर दर्जन होने के बाद समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ​​ने एक्स पर पोस्ट किया है. कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी के मामले में FIR दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. इससे यह साफ हो गया है कि मामला बहुत गंभीर है और राम मंदिर में दान की चोरी का आरोप लगने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के पास एक दिन भी सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा दें और मामले की निष्पक्ष जांच पूरी हो. दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी सुरक्षा और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी चोरी कैसे हुई. इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, यह तय किया जाना चाहिए और दोषियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.

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