दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत, बीमार पिता की देखभाल के लिए आए थे राजधानी
गुड़गांव के रहने वाले विवेक अग्रवाल अपने 75 वर्षीय बीमार पिता राधे श्याम अग्रवाल की देखभाल के लिए उनके साथ रहना चाहते थे। पिता साकेत के मैक्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। विवेक अपने पूरे परिवार और रिश्तेदारों के साथ मालवीय नगर के इस होटल में ठहरे थे, लेकिन बुधवार तड़के लगी भीषण आग ने इस परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी।
इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 5 सदस्यों समेत कुल 8 लोगों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई। मरने वालों में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, मां प्रेमलता, बड़ी बेटी जिविसा उर्फ एंजेल और छोटी बेटी वार्या उर्फ पल शामिल हैं। इसके अलावा विवेक के मौसा झुमरी लाल, मौसी कमला और मामा अशोक गोयल भी इस अग्निकांड का शिकार हो गए।
- दादू से मिलने बेंगलुरु से आई थी: विवेक के ससुर प्रेम बंसल ने भारी मन से बताया कि विवेक गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में डायरेक्टर थे।
- उनके पिता राधे श्याम अग्रवाल फेफड़ों (लंग्स) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
- जब डॉक्टरों ने कह दिया कि उन्हें अब बचाया नहीं जा सकता, तो पूरा परिवार दिल्ली आ गया।
- मंगलवार रात को विवेक अपनी पत्नी, मां, छोटी बेटी और रिश्तेदारों के साथ होटल के ग्राउंड फ्लोर पर रुके थे।
- विवेक के मौसा-मौसी अजमेर (राजस्थान) और माम किशनगढ़ (राजस्थान) से आए थे।
- वहीं, बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही विवेक की बड़ी बेटी जिविसा (एंजेल) भी अपने दादू को आखिरी बार देखने और उनसे मिलने के लिए बुधवार सुबह करीब 4 बजे ही होटल पहुंची थीं।
- बड़ी बेटी के होटल पहुँचने के कुछ ही देर बाद, सुबह तड़के अचानक होटल में भीषण आग लग गई।
- जब तक कोई कुछ समझ पाता या बाहर निकल पाता, आग और जहरीले धुएं ने सबको अपनी चपेट में ले लिया।
देर होने के कारण रात में होटल में रुक गए, सुबह नाश्ते के लिए पहुंचे, तभी लग गई आग
- दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को एक होटल में लगी आग में गुड़गांव के सीए के परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई।
- इसके अलावा राजस्थान से आए उनके तीन रिश्तेदारों की भी जान चली गई।
- हादसे के बाद सभी के मन में सवाल था कि आखिर गुड़गांव का परिवार दिल्ली के होटल में क्यों गया था?
- जब इसका जवाब मिला तो ऐसा लगा कि मौत सभी को खींचकर हादसे वाली जगह पर ले गई थी।
- जानकारी के अनुसार, परिवार एक दिन पहले मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती अपने पिता का हाल जानने दिल्ली गया था।
- मंगलवार को ही बेंगलुरु से बेटी भी आई थी। इसके अलावा बुधवार सुबह राजस्थान से रिश्तेदार भी यहां पहुंचे थे।
- पिता का हालचाल जानने में देर रात हो गई। ऐसे में सभी ने गुड़गांव न लौटकर दिल्ली के होटल में रुकना ठीक समझा।
- बुधवार सुबह नाश्ते के लिए होटल गए, उसी दौरान आग लग गई। घटना का पता चलते ही सेक्टर-46 में सीए के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई।
गुड़गांव सेक्टर-46 की संघर्ष समिति के प्रधान विनोद ठाकरान ने बताया कि विवेक अग्रवाल मिलनसार थे और आरडब्ल्यूए व समिति के कामों में सहयोग करते थे। विवेक की बड़ी बेटी बारहवीं के बाद बेंगलुरु से बीटेक कर रही थी। छोटी बेटी 11वीं में थी। अजमेर से आए मामा मार्बल कारोबारी थे, जबकि मौसा रिटायर्ड बैंक अधिकारी थे। विवेक अग्रवाल के मौसा नरेश गुप्ता ने कहा कि विवेक बहुत अच्छे इंसान थे। उनकी मां प्रेमलता पार्क में टहलने और मंदिर आती थीं। इस दौरान बातचीत होती रहती थी। आग की खबर के बाद जब मीडिया और अन्य लोग घर पहुंचे तो शुरुआत में भ्रम की स्थिति बन गई, क्योंकि आसपास एक ही लाइन में तीन लोगों का नाम विवेक अग्रवाल है। कुछ लोग गलत घर पर भी पहुंच गए।
आग लगने के बाद भाई को फोन कर मांगी थी मदद
- विवेक के ससुर प्रेम बंसल ने बताया कि आग लगने के बाद विवेक ग्राउंड फ्लोर पर फंस गए थे।
- तब उन्होंने मदद के लिए सबसे पहले दिल्ली में रहने वाले अपने चाचा के बेटे महेंद्र को कॉल किया था और बताया था कि सभी लोग आग में फंस गए हैं।
- इसके बाद महेंद्र ने अन्य लोगों को सूचना दी। लेकिन जब अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि विवेक समेत 8 लोगों की मौत हो गई है। उनका कहना था कि आग के बाद शीशा तोड़ने के लिए कोई औजार नहीं था।
- समय से मदद नहीं मिल पाने के कारण उनकी बेटी-दामाद समेत 8 लोगों की मौत हो गई।
- बताया जा रहा है आग के चपेट में आने से तर्जनी बुरी तरह से झुलस गई थी।
- शायद उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराना पड़ेगा। उनकी ज्वेलरी से उनकी पहचान हो पाई।
- सभी शवों को पोस्टमार्टम एम्स के मोर्चरी में रखवा दिया गया है।
