बजट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बड़ा हमला: “प्रदेश को ₹5.56 लाख करोड़ के कर्ज में डुबोया, बजट नहीं यह सिर्फ लफ्फाजी है।”

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हरियाणा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बार बजट पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सरकार पर पलटवार किया है बजट के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए इसे “कोरी भाषणबाजी” और जनता को गुमराह करने वाला दस्तावेज करार दिया। हुड्डा ने साफ कहा कि सरकार नए कर्ज का इस्तेमाल सिर्फ पुराने कर्जों की किस्तें और ब्याज भरने के लिए कर रही है।

दिवालियापन की ओर बढ़ता हरियाणा”हुड्डा ने दावा किया कि बीजेपी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण हरियाणा पर कुल कर्ज का बोझ 5,56,623 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।आंकड़ों का खेल: आंतरिक ऋण ₹3.91 लाख करोड़ है, जबकि अन्य देनदारियां और सार्वजनिक उपक्रमों का कर्ज मिलाकर यह ₹5.56 लाख करोड़ को पार कर चुका है।सरकार इस साल ₹76,250 करोड़ का कर्ज ले रही है, लेकिन इसमें से ₹65,667 करोड़ तो पुराने कर्ज और ब्याज को चुकाने में ही निकल जाएंगे। विकास कार्यों के लिए केवल ₹10,593 करोड़ ही बचेंगे।

हुड्डा ने सरकार की फ्लैगशिप योजना ‘लाडो लक्ष्मी’ पर सवाल उठाते हुए इसे महिलाओं के साथ धोखा बताया। प्रदेश में 18-60 वर्ष की महिलाओं की संख्या लगभग 82.5 लाख है। ₹2,100 प्रति माह के हिसाब से साल भर के लिए ₹20,000 करोड़ चाहिए।बजट में केवल ₹6,500 करोड़ का प्रावधान है। हुड्डा के अनुसार, इससे सिर्फ 31% महिलाओं को ही लाभ मिल पाएगा, जबकि 67.5% महिलाएं योजना से बाहर रहेंगी।

 

विपक्ष ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बजट आवंटन को अपर्याप्त बताते हुए शिक्षा बजट का मात्र 6.2% (GSDP का 1.9%) आवंटित, जबकि नई शिक्षा नीति 6% की मांग करती है।स्वास्थ्य बजट का केवल 6.2%, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (8%) से काफी कम है।कृषि 70% आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन कृषि को बजट का मात्र 4.8% ही मिला।

हुड्डा ने सरकार के प्रति व्यक्ति आय के दावों पर भी हमला बोला।”कांग्रेस के 10 साल में आय 4 गुना बढ़ी थी (₹37,000 से ₹1.5 लाख), जबकि बीजेपी के 10 साल में यह सिर्फ 2 गुना ही बढ़ पाई। अगर हमारी रफ्तार होती तो आज हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय ₹6-7 लाख होती।”उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा आज बेरोजगारी में नंबर वन बन चुका है क्योंकि नए उद्योग आ नहीं रहे और पुराने पलायन कर रहे हैं।

 

11 साल सत्ता में रहने के बाद यमुना सफाई की बात करने पर हुड्डा ने तंज कसा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में पंजाब से हरियाणा के हिस्से का पानी (SYL) लेने का कोई ठोस जिक्र क्यों नहीं किया, जबकि प्रदेश में पानी की भारी किल्लत है।

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