प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आज स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए पार्टी नेताओं ने उनके छायाचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

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शिमला 27 मई, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आज स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए पार्टी नेताओं ने उनके छायाचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अमित नंदा ने इस दौरान कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में नेहरू जी का महान योगदान रहा। स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की जो नींव रखी आज उसी का परिणाम है कि विश्व मे भारत एक महा शक्ति के तौर पर जाना जाता है। नेहरू जी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किये।
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल ने कहा कि नेहरू जी की सोच आधुनिक भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा मील का पत्थर साबित हुई है। देश को उनका मार्गदर्शन आज भी हमारा मार्ग प्रसस्त करता है। नेहरू जी ने देश की आजादी से लेकर देश के नव निर्माण में जो योगदान दिया है यह देश उसे कभी नही भुला सकता। उनके दिखाए पथ का अनुसरण करते हुए हमें कांग्रेस की मजबूती के लिये एकजुटता से कार्य करना होगा,यही उनके लिये हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विनीत गौतम, एस. के. सहगल, नगर निगम शिमला के पार्षद चमन प्रकाश, विनोद भाटिया,राज कुमार व गीतांजलि भागडा इस के अतिरिक्त प्रभा वर्मा,आर.पी.सिंह, अमनदीप सिंह, रवि दत्त, बिट्टू घारू, मनीषा मेहता, कृष्णा कुमारी,उमा शर्मा, वीना विज, बबली, रत्न सिंह मालौनबाला, सतपाल गिल,कपिल कुमार व अन्य कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने पंडित नेहरू को याद करते हुए कहा है कि देश सदैब उनका ऋणी रहेगा।
श्री रेणुकाजी में विनय कुमार ने कहा है कि पंडित नेहरू की दूरदर्शी सोच ने आधुनिक भारत को अपने पैरों पर खड़ा किया।
विनय कुमार ने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का आधुनिक भारत के निर्माण में अतुलनीय योगदान रहा है। उन्हें बच्चों से बेहद प्यार था, इसलिए उन्हें “चाचा नेहरू” के नाम से भी जाना जाता है।

​विनय कुमार ने कहा कि 1916 में वे पहली बार महात्मा गांधी से मिले और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने ऐशो-आराम की ज़िंदगी छोड़कर पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में खुद को झोंक दिया। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान उन्हें 9 बार जेल जाना पड़ा और उन्होंने अपने जीवन के लगभग 9 वर्ष जेल में बिताए।
नेहरू जी ने देश में विज्ञान, तकनीक और उद्योगों को बढ़ावा दिया। भाखड़ा- नंगल बांध, आईआईटी आईआईएम और एम्स जैसे बड़े संस्थानों की स्थापना उनके कार्यकाल में ही हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, उन्होंने शीतयुद्ध के समय किसी भी महाशक्ति (अमेरिका या सोवियत संघ) के गुट में शामिल न होने का फैसला किया और ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ की नींव रखी। चीन के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए उन्होंने ‘पंचशील सिद्धांत’ की शुरुआत की थी। एक लेखक के रूप में ​जवाहरलाल नेहरू एक बेहतरीन लेखक भी थे। जेल में रहने के दौरान उन्होंने कई प्रसिद्ध किताबें लिखीं।
विनय कुमार ने कहा कि नेहरू जी एक दूरदर्शी नेता, समाजवादी विचारक और आधुनिक लोकतांत्रिक भारत की मजबूत नींव रखने वाले महान व्यक्तित्व थे।

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