चंडीगढ़ में किरायेदारी व्यवस्था होगी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह

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चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ किरायेदारी नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के तहत संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में विस्तारित असम किरायेदारी अधिनियम, 2021 को लागू किया गया है। प्रशासक, संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ द्वारा 10 सितंबर 2026 को अधिसूचित ये नियम पूरे चंडीगढ़ में लागू होंगे।
नई व्यवस्था का उद्देश्य मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच किरायेदारी संबंधों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। नियमों में किरायेदारी समझौते की सूचना और पंजीकरण, किराये एवं अन्य शुल्कों के निर्धारण, बकाया किराये, परिसर का कब्जा वापस लेने तथा विवादों के त्वरित निपटारे के लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की व्यवस्था की गई है।

दो माह के भीतर देनी होगी किरायेदारी समझौते की सूचना
नए नियमों के तहत मकान मालिक और किरायेदार को किरायेदारी समझौता किए जाने के दो माह के भीतर संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से किराया प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होगी।
सूचना प्राप्त होने के बाद किराया प्राधिकरण सात दिनों के भीतर विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) जारी करेगा। यह ई-रसीद के रूप में संबंधित पक्षकारों के पंजीकृत मोबाइल नंबर अथवा ई-मेल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी जाएगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा किरायेदारी का विवरण
किराया प्राधिकरण को अपने गठन के तीन माह के भीतर स्थानीय भाषा और प्रशासक द्वारा निर्धारित अन्य भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित करना होगा। इसके माध्यम से किरायेदारी से संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे।
पंजीकरण के सात दिनों के भीतर किरायेदारी का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी की जाएगी।

किरायेदारी रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय
नियमों में किरायेदारी से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की गोपनीयता सुनिश्चित की गई है। इन रिकॉर्ड तक केवल संबंधित पक्षकारों और किराया प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारियों की पहुंच होगी। आम जनता अथवा किसी अनधिकृत व्यक्ति को यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

किराये और अन्य शुल्कों में बदलाव के लिए आवेदन की सुविधा
मकान मालिक अथवा किरायेदार किराया, बिजली, पानी, रखरखाव और सुरक्षा सेवाओं जैसे अन्य शुल्कों के निर्धारण अथवा संशोधन के लिए किराया प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकेंगे।
आवेदन पर निर्णय लेते समय प्राधिकरण उसी क्षेत्र में प्रचलित किराये की दरों को ध्यान में रख सकता है। यदि कोई पक्ष प्राधिकरण के निर्णय से असंतुष्ट होता है तो परिसर के मूल्यांकन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया जा सकता है। मूल्यांकन का शुल्क आवेदक को वहन करना होगा।

मकान मालिक किराया लेने से इनकार करे तो प्राधिकरण के पास जमा होगा
यदि मकान मालिक किराया या अन्य देय राशि लेने से इनकार करता है अथवा उसकी रसीद जारी नहीं करता, तो किरायेदार लगातार दो माह तक आरटीजीएस, एनईएफटी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट जैसे मान्य माध्यमों से भुगतान करने का प्रयास कर सकता है।
इसके बावजूद मकान मालिक भुगतान स्वीकार नहीं करता है तो किरायेदार संबंधित राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा कर सकेगा।

कब्जा वापस लेने के लिए किराया न्यायालय में आवेदन
किरायेदारी समझौते की अवधि के दौरान मकान मालिक या उसकी मृत्यु की स्थिति में उसके कानूनी उत्तराधिकारी आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ किरायेदार से परिसर का कब्जा वापस लेने के लिए किराया न्यायालय में आवेदन कर सकेंगे।

बकाया राशि पर ब्याज का प्रावधान
पक्षकारों के बीच किसी अलग व्यवस्था पर सहमति नहीं होने की स्थिति में किराये और अन्य शुल्कों की बकाया राशि अथवा सुरक्षा राशि और अग्रिम किराये की वापसी पर ब्याज की गणना भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम सीमांत निधि लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) से दो प्रतिशत अधिक दर पर की जाएगी।

पक्षकार स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से हो सकेंगे पेश
किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय अथवा किराया अधिकरण के समक्ष पक्षकार स्वयं उपस्थित हो सकते हैं। इसके अलावा वे अपनी ओर से किसी अधिकृत प्रतिनिधि या विधि व्यवसायी—अधिवक्ता, वकील अथवा अटॉर्नी—को प्रतिनिधित्व के लिए अधिकृत कर सकते हैं।

विवादों के निपटारे के लिए समयसीमा तय
नए नियमों में किरायेदारी विवादों के त्वरित निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है।
किराया प्राधिकरण के समक्ष आवेदन मिलने के बाद दूसरे पक्ष को 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। कारण दर्ज होने पर यह अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
किराया न्यायालय और किराया अधिकरण के समक्ष अपील में अपील के आधार संक्षिप्त और क्रमांकित रूप में देने होंगे तथा चुनौती दिए गए आदेश की प्रमाणित प्रति लगानी होगी।
किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिनों के भीतर अपील पर निर्णय करना होगा। सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति होगी।
किराया न्यायालय के आदेशों का निष्पादन दूसरे पक्ष को नोटिस की तामील के 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना होगा।
आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय अधिवक्ताओं अथवा सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति भी कर सकेगा।

मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए निश्चितता बढ़ेगी
उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी निशांत कुमार यादव, आईएएस ने कहा कि नए नियम चंडीगढ़ में मकान मालिकों और किरायेदारों के संबंधों में अधिक सुगमता, पारदर्शिता और निश्चितता लाएंगे। उन्होंने कहा कि नियमों से किरायेदारी से जुड़े विवादों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित और समयबद्ध तंत्र भी सुनिश्चित होगा।

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