जिनपिंग-पुतिन के भारत दौरे को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद, 30 हजार जवान संभालेंगे मोर्चा
रूसी राष्ट्रपति 11 सितंबर और चीनी राष्ट्रपति 12 सितंबर को दिल्ली पहुंच सकते हैं. दोनों नेता पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरेंगे और वहां से सीधे चाणक्यपुरी के होटलों के लिए रवाना होंगे. पुतिन के आने से पहले ही तीन रूसी ट्रांसपोर्ट विमान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतर चुके हैं.
सम्मेलन स्थल भारत मंडपम, एयरपोर्ट और होटलों की सुरक्षा के लिए करीब 30,000 जवान तैनात किए गए हैं. इनमें आधी दिल्ली पुलिस और बाकी अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां हैं. बेहतर समन्वय के लिए पूरे सुरक्षा तंत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर हर सेक्टर की कमान डीसीपी या एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है.
- रूस और बांग्लादेश: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बांग्लादेश के वीआईपी प्रतिनिधि एक ही होटल में रुकेंगे.
- चीन और बेलारूस: चीन और बेलारूस के राष्ट्रपति एक साथ एक होटल में ठहरेंगे.
- ईरान: ईरान के राष्ट्रपति के लिए एक अलग होटल की व्यवस्था की गई है.
- दक्षिण अफ्रीका और बुरुंडी: दोनों देशों के राष्ट्रपति एक ही होटल में रहेंगे.
- अन्य देश: इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, इथियोपिया के नेता एक होटल में रहेंगे, जबकि यूएई के क्राउन प्रिंस और सऊदी अरब, ब्राजील के वित्त मंत्री अलग होटल में ठहरेंगे.
शनिवार को सभी राष्ट्राध्यक्ष दोपहर 1:30 बजे से 2:15 बजे के बीच और रविवार को सुबह 8:50 बजे से 9:25 बजे के बीच भारत मंडपम पहुंचेंगे. दोनों दिन सबसे पहले यूएई के क्राउन प्रिंस और सबसे अंत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन पहुंचेंगे. रूस और चीन के काफिले में सबसे ज्यादा गाड़ियां होंगी. यातायात पुलिस ने रूट तय कर लिए हैं और रिहर्सल भी पूरी कर ली गई है.
