सुखबीर नहीं हुए पेश, पंजाब से बाहर होने का हवाला; जारी हुआ NBW

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शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री Sukhbir Singh Badal बुधवार को 8 साल पुराने मानहानि मामले में चंडीगढ़ जिला कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनके वकील राजेश राय ने अदालत में अर्जी दाखिल कर व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी। अर्जी में कहा गया कि सुखबीर बादल पारिवारिक कारणों के चलते पंजाब से बाहर हैं, इसलिए वे सुनवाई में शामिल नहीं हो सकते।

यह मामला वर्ष 2017 का है। मोहाली निवासी और अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह ने सुखबीर बादल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, 4 जनवरी 2017 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal के राजिंदर पाल सिंह के आवास पर जाने के बाद सुखबीर बादल ने मीडिया में बयान दिया था, जिसमें उन्होंने अखंड कीर्तनी जत्था को प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का राजनीतिक फ्रंट बताया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से उनके संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा।

कोर्ट के आदेश के बावजूद सुखबीर बादल 17 दिसंबर 2025 को भी पेश नहीं हुए थे। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल गर्ग की अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए थे। सख्त कार्रवाई की आशंका के बीच वह बाद में अदालत में पेश हुए, जहां उन्हें फिर से जमानत मिल गई।

इस मामले को रद्द कराने के लिए सुखबीर बादल ने Punjab and Haryana High Court में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद से मामला चंडीगढ़ जिला अदालत में ही लंबित है।

इससे पहले 2 फरवरी 2026 की सुनवाई के दौरान भी सुखबीर बादल ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अर्जी दी थी। उस समय उन्होंने अमृतसर में पार्टी की एक अहम बैठक का हवाला दिया था और कहा था कि यदि वे बैठक में शामिल नहीं होते तो दूर-दराज से आए लोगों को बिना किसी नतीजे के लौटना पड़ता। उन्होंने अपनी गैरहाजिरी को अनजाने में बताया था और अगली तारीख पर पेश होने का भरोसा दिया था।

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