रेड सी में शिपिंग संकट गहराया, सऊदी अरब ने बंद की तेल पाइपलाइन

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वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद कर दी है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतें 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़

वेस्ट एशिया में बढ़ते युद्ध से जहां एक ओर तेल की सप्लाई पर असर देखने को मिला वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब ने भी अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ड्रोन हमले के बाद सऊदी की ओर से लिए गए इस स्टेप के बाद से दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फिर से 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। शुक्रवार को तेल की कीमत 108 डॉलर तक भी पहुंची थे लेकिन बाद में थोड़ी गिरावट आई, फिलहाल कीमतें ऐसे लेवल पर हैं जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

लगातार बढ़ रहे तनाव और ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने सख्ती दिखाई है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस पाइपलाइन के जरिए वह अपने तेल को देश के दूसरे हिस्से तक पहुंचा सकता है वो भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर हुए बिना। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज के रास्ते टैंकरों की आवाजाही पहले ही काफी कम हो चुकी है और ये रास्ता लगभग बंद की कगार पर है, जिससे एक और सप्लाई रूट पर बुरा असर देखने को मिला है।

तेल सप्लाई की जरूरी पाइपलाइन बंद करने के बाद सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद किया गया है। बता दें कि बीते कुछ महीनों में इस पाइपलाइन के जरिए रोजाना 40 लाख से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था, यह मात्रा ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 4% से 5% है। ऐसे में पाइपलाइन बंद होने से पहले से दबाव में चल रही ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर और असर पड़ सकता है।

सऊदी अधिकारियों ने जानकारी दी कि गुरुवार की सुबह रियाद और मदीना के क्षेत्रों में पाइपलाइन को निशाना बनाया गया। अधिकारियों की मानें तो हमले में कुछ लोगों के घायल होने और पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है, हालांकि एक्सपोर्ट पर कितना असर देखने को मिलेगा, इसकी वास्तविक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों में मदीना के दक्षिण में पाइपलाइन के पास काला धुआं उठता दिखाई दिया।

सऊदी अरब के एक्शन का सबसे बड़ा असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर देखने को मिल रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही कम होने, लाल सागर और बाब अल-मंदब में बढ़ते खतरे और अब सऊदी अरब की मुख्य सप्लाई वाली पाइपलाइन बंद होने से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स की चेतावनी के मुताबिक लंबे समय तक तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने से कई अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

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