चंडीगढ़ में जुटेंगे देशभर के मेयर, दो दिवसीय सम्मेलन में बनेगा शहरों के विकास का रोडमैप

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देश के शहरों को कैसे अधिक सक्षम, स्वच्छ और सुविधाजनक बनाया जाए, स्थानीय निकायों को कैसे मजबूत किया जाए और बदलती जरूरतों के मुताबिक शहरी व्यवस्था को किस तरह नया रूप दिया जाए—इन तमाम मुद्दों पर मंथन के लिए सोमवार से चंडीगढ़ में देशभर के मेयर जुटेंगे। सेक्टर-10 स्थित होटल माउंट व्यू में सोमवार और मंगलवार को 118वीं ऑल इंडिया मेयर्स कॉन्फ्रेंस होगी। इसमें 19 राज्यों से करीब 40 मेयर और शहरी निकायों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया सोमवार सुबह 10 बजे सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद विभिन्न सत्रों में शहरी स्थानीय निकायों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल, नागरिकों की भागीदारी और शहरों को स्वच्छ, हरित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाने के उपायों पर विशेष जोर रहेगा।

नॉर्थईस्ट से लेकर दक्षिण और उत्तर से पश्चिम व सेंट्रल इंडिया तक के शहरों की भागीदारी सम्मेलन में रहेगी। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘सशक्त नगर- विकसित भारत’ रखा गया है। रविवार को यूटी स्टेट गेस्ट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने सम्मेलन की तैयारियों और एजेंडे की जानकारी दी। उनके साथ ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल के सचिव मनोज कुमार भी मौजूद रहे। सौरभ जोशी ने कहा कि सम्मेलन महज औपचारिक बैठक नहीं होगी। इसमें अलग-अलग शहरों में किए जा रहे बेहतर काम, सफल प्रयोग और शहरी समस्याओं के समाधान के मॉडल साझा किए जाएंगे, ताकि दूसरे शहर भी उनसे सीख लेकर अपनी व्यवस्था में सुधार कर सकें।

ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल की अध्यक्ष और करनाल की मेयर रेणु बाला गुप्ता भी सम्मेलन में शामिल होंगी। चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम ने सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की भी इसमें भागीदारी रहेगी। चंडीगढ़ के सांसद, विधायक, राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्ष और नगर निगम पार्षदों को भी उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इससे मेयरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद का मंच तैयार होगा। सम्मेलन में शहरों के योजनाबद्ध विकास के साथ स्वच्छता, हरित क्षेत्र, जल प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक केंद्रित सेवाओं पर मंथन होगा। कचरे को संसाधन में बदलने, जल और पर्यावरण संरक्षण, तकनीक आधारित प्रशासन तथा शहरों के विकास में जनभागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के मॉडल भी साझा किए जाएंगे।

वहीं, देश के अन्य शहरों के मेयर भी अपने-अपने शहरों में अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करेंगे। इससे नगर निगमों को एक-दूसरे के सफल प्रयोगों से सीखने और उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने का अवसर मिलेगा। सम्मेलन का समापन मंगलवार को दोपहर करीब 2 बजे होगा। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच व्यापक संवाद के जरिए सम्मेलन से शहरी निकायों को मजबूत करने और विकसित भारत की दिशा में शहरों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव सामने आने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर चंडीगढ़ अपने मेयर के कार्यकाल का मुद्दा भी उठाएगा। वर्तमान में चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का है। इसे बढ़ाने की मांग सम्मेलन में चर्चा के लिए रखी जाएगी। इसके अलावा शहरी निकायों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी मेयर अपने अनुभव साझा करेंगे। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि देश के प्रत्येक शहर की अपनी अलग चुनौती है और कई शहरों ने स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक प्रभावी समाधान विकसित किए हैं। मेयर्स कॉन्फ्रेंस ऐसे प्रयोगों को एक-दूसरे तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है। इससे शहरों को बेहतर व्यवस्था लागू करने और नागरिक सुविधाओं में सुधार के नए रास्ते मिलेंगे। सम्मेलन के दौरान चंडीगढ़ अपने उन कार्यों और व्यवस्थाओं को भी मेहमान मेयरों के सामने प्रस्तुत करेगा, जिन्हें शहर की बेहतर शहरी व्यवस्था के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। इनमें योजनाबद्ध विकास, स्वच्छता, ग्रीन स्पेस, जल प्रबंधन और डिजिटल सेवाएं प्रमुख हैं। मेयरों के लिए प्रस्तुतियों के साथ कुछ महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा भी कराया जाएगा, ताकि वे चंडीगढ़ में लागू व्यवस्थाओं को मौके पर समझ सकें।

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