चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन प्लान, प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने पुलिस अधिकारियों के साथ की समीक्षा
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक प्रताप सिंह के साथ शुक्रवार को चंडीगढ़ पुलिस के साथ नशा तस्करी को रोकने और चंडीगढ़ को नशा मुक्त शहर बनाने के लिए एक बैठक की समीक्षा की। नशे के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस को सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए,बैठक चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, पुलिस महानिदेशक डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार, सभी एसएसपी/एसपी, सभी डीएसपी और एसएचओ की उपस्थिति में हुई। प्रशासक ने कहा कि पहली प्राथमिकता चंडीगढ़ के अधिकार क्षेत्र में नशीली पदाथो की आपूर्ति और बिक्री को रोकना होना चाहिए। उन्होंने पुलिस को ड्रग सप्लायर, पेडलर और उन इलाकों की पहचान करने का निर्देश दिया जहां ड्रग्स बेचे या इस्तेमाल किए जा रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। डीजीपी यूटी ने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को और अधिक पुलिस कर्मियों, साइबर विशेषज्ञों, कानूनी विशेषज्ञों और अनुभवी अधिकारियों के साथ मजबूत करने पर जोर दिया। कटारिया ने शहर में ड्रग तस्करी के खतरे को रोकने के लिए पुलिस स्टेशनों में बीट सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने ड्रग पेडलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया और यदि किसी पुलिस अधिकारी की ओर से कोई लापरवाही पाई जाती है तो दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासक ने यह भी निर्देश दिया कि नशीली या नियंत्रित पदार्थों वाली दवाओं को बिना उचित नुस्खे के बेचे जाने से रोकने के लिए मेडिकल स्टोर पर अधिक बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस की उपस्थिति और निगरानी में सुधार के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल गश्त और औचक निरीक्षण का सुझाव दिया। मीटिंग में चंडीगढ़ में ड्रग्स से जुड़े मौजूदा हालात का रिव्यू किया गया। बताया गया कि कई पहचाने गए ड्रग पेडलर पहले से ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, जिनमें से कई एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने शहर भर में नए सोर्स और 58 हॉटस्पॉट भी पहचाने हैं, जहां ड्रग्स के इस्तेमाल या तस्करी की खबरें आई हैं और इन हॉटस्पॉट और पहले से शामिल आरोपियों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है, साथ ही कानून के मुताबिक ज़रूरी कार्रवाई भी की जा रही है। नागरिकों के लिए ड्रग्स के बारे में जानकारी देने के सिस्टम को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।डीजीपी ने कहा कि एनडीपीएस फ्रेमवर्क के तहत एक स्ट्रक्चर्ड, कॉन्फिडेंशियल और रिस्पॉन्सिव सिस्टम डेवलप किया जा रहा है, ताकि जनता को ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों या संदिग्ध ड्रग पेडलर की रिपोर्ट करके पुलिस की “आंख और कान” बनने के लिए बढ़ावा दिया जा सके। एडमिनिस्ट्रेटर ने ज़ोर देकर कहा कि चंडीगढ़ को ड्रग-फ्री बनाने के लिए सख्त पुलिस कार्रवाई, रेगुलर मॉनिटरिंग, नशे की लत से जूझ रहे लोगों का रिहैबिलिटेशन और परिवारों और समाज से एक्टिव सपोर्ट की ज़रूरत होगी। उन्होंने चंडीगढ़ को एक सुरक्षित और नशा-मुक्त शहर बनाने के लिए लगातार और मिलकर कोशिश करने की अपील की।
