हरियाणा के इन जिलों में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, सोनीपत-करनाल रूट भी शामिल, देखें पूरी लिस्ट
हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, 28 जून को पानीपत से इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत करेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के विभिन्न जिलों के लिए करीब 80 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिनमें से 40 बसें अकेले पानीपत डिपो से संचालित होंगी.
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर डीएसपी सुरेश सैनी के साथ रोडवेज डिपो के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक बस डिपो का निरीक्षण किया है. इन बसों के शुरू होने से यात्रियों को भीषण गर्मी में एसी सुविधा के साथ आरामदायक सफर मिलेगा. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों और हजारों छात्र-छात्राओं को भी सीधा लाभ पहुंचेगा.
जेबीएम कंपनी के इंजीनियर प्रतीक ने बताया कि 28 जून से हरियाणा में कुल 80 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. ये बसें पानीपत, सोनीपत, यमुनानगर, अंबाला, करनाल और रोहतक सहित कई जिलों में चलेंगी.
उन्होंने बताया कि बसों की दूरी मौसम लोड फैक्टर पर निर्भर करती है, क्योंकि गर्मियों में एसी चलने से बैटरी की खपत बढ़ती है. इसके बावजूद एक बार फुल चार्ज होने पर बस करीब 150 किलोमीटर तक चल सकती है. बसों में री-जनरेशन फीचर भी दिया गया है, जिससे डाउनहिल स्लोप पर चलते समय बैटरी दोबारा चार्ज भी होती रहेगी.
पानीपत रोडवेज डिपो के ट्रैफिक मैनेजर जयवीर सिंह ने बताया कि डिपो में कुल 45 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जिनमें से 5 पहले से सेवा में हैं जबकि 40 नई बसों का उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इन बसों का संचालन सिंघु बॉर्डर, सोनीपत, गोहाना, सफीदों, करनाल, शामली, बापौली और बबैल समेत विभिन्न रूटों पर किया जाएगा.
इसके अलावा यात्रियों की मांग और संख्या के अनुसार अन्य रूटों पर भी बसें चलाई जाएंगी. किराए के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक बसों का किराया सामान्य एसी बसों के बराबर ही रहेगा. वहीं बसों की फ्रीक्वेंसी यात्रियों की संख्या और जरूरत के हिसाब से तय की जाएगी.
कॉलेज छात्रा वर्षा ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के शुरू होने से छात्रों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि कई छात्र दूर-दराज गांवों से पढ़ाई के लिए आते हैं और भीषण गर्मी में सफर करना मुश्किल हो जाता है. एसी बसों के आने से छात्रों की तबीयत खराब होने जैसी समस्याएं कम होंगी और वे बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे. उन्होंने बताया कि इसराना क्षेत्र सहित आसपास के 10 से 20 गांवों के छात्रों को इस सुविधा का विशेष लाभ मिलेगा, क्योंकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी रोजाना बसों पर निर्भर रहते हैं.
