NCERT सिलेबस में बदलाव: अब 9वीं के छात्र पढ़ेंगे आपातकाल और SIR के नए अध्याय

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NCERT ने अपनी कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड (भाग-1)’ में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस किताब में पहली बार ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) पर एक समर्पित अध्याय शामिल किया गया है। यह कदम चुनाव आयोग द्वारा चुनावी रोल के रिवीजन को लेकर उठाए गए प्रयासों के एक साल बाद उठाया गया है।

नई किताब के अनुसार, SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची (Electoral Roll) को अपडेट करना, उसका सत्यापन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को सुधारना है। NCERT ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति सूची में न जुड़ सके।

किताब में ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SSR) का भी उल्लेख है, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाते हैं। इसके साथ ही, दिवंगत व्यक्तियों के नाम हटाना और पते में बदलाव जैसी प्रक्रियाओं को भी समझाया गया है। इसके अलावा, ईवीएम (EVM), वीवीपैट (VVPAT), आदर्श आचार संहिता और मतदाता जागरूकता अभियानों को भी चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के जरूरी उपाय के तौर पर पढ़ाया जाएगा।

किताब के ‘डेमोक्रेसी’ चैप्टर में ‘चुनौतियां’ (Challenges to democratic practices in India) शीर्षक के तहत 1975-77 के दौरान लगे आपातकाल का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष के बाद जून 1975 में ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर आपातकाल लगाया गया था।

किताब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस दौर में मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई थी और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।

नई पाठ्यपुस्तक में भारत की  राजनीति के बदलते स्वरूप को भी रेखांकित किया गया है। इसमें 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बनी गठबंधन सरकारों (Coalition Governments) का भी विवरण दिया गया है, जो छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास को करीब से समझने में मदद करेगा।

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