चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के CEO आईएएस डी. कार्तिकेयन का ‘ओपन डोर’ मॉडल, जनता से सीधा संवाद शुरू
‘ओपन डोर’ फैसला: बिना अपॉइंटमेंट सीधे मिल सकेगी जनता, पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम
चंडीगढ़, 4 मई। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और आईएएस अधिकारी डी. कार्तिकेयन ने कार्यभार संभालते ही प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव करते हुए ‘ओपन डोर’ नीति लागू कर दी है। अब आम नागरिक बिना किसी पूर्व अपॉइंटमेंट के सीधे सीईओ से मुलाकात कर सकते हैं।
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में हालिया प्रशासनिक बदलावों के बीच आईएएस अधिकारी डी. कार्तिकेयन को एक साथ कई अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी सचिव, सतर्कता सचिव, कृषि सचिव, कृषि विपणन बोर्ड के सचिव के साथ-साथ चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने कार्यशैली में बदलाव का संकेत देते हुए एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसकी शहरभर में चर्चा हो रही है।
डी. कार्तिकेयन ने अपने कार्यालय के दरवाजे आम जनता के लिए खोल दिए हैं। अब कोई भी नागरिक कार्यालय समय के दौरान बिना किसी पूर्व अपॉइंटमेंट के सीधे उनसे मिल सकता है। इस संबंध में उनके कार्यालय के बाहर एक स्पष्ट सूचना भी लगाई गई है, जिस पर लिखा है—“Public is free to meet the officer during office hours without any prior appointment।”
आम तौर पर उच्च अधिकारियों से मिलने के लिए लंबी प्रक्रिया, अपॉइंटमेंट और कई स्तरों की औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। कई बार तो लोगों को अधिकारियों के निजी सहायकों (PA) तक से मिलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सीईओ का यह ‘ओपन डोर’ फैसला आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
अब लोग अपनी शिकायतें, सुझाव और समस्याएं सीधे अधिकारी के सामने रख सकेंगे, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि समस्याओं के समाधान में भी तेजी आने की उम्मीद है।
प्रशासन का मानना है कि यह पहल पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करेगी। जब अधिकारी सीधे जनता से संवाद करेंगे, तो जमीनी स्तर की समस्याओं को समझना और उनका त्वरित समाधान करना आसान होगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में भरोसा भी बढ़ेगा।
इस फैसले को लेकर शहर के लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वरिष्ठ नागरिक आर.के. गर्ग ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि चंडीगढ़ यूटी में कई आईएएस अधिकारी तैनात हैं, लेकिन आम जनता के लिए उनसे मिल पाना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों के पीए तक से मिलना भी मुश्किल होता है, जबकि वे डिजिटल लोक ऑफिस में मौजूद रहते हैं।
उनके अनुसार, ऐसे माहौल में सीईओ द्वारा सीधे जनता से मिलने का निर्णय प्रशासनिक कार्यशैली में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल अन्य विभागों में भी लागू की जाती है, तो जनसुनवाई व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकती है। इससे न केवल शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी, बल्कि प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, डी. कार्तिकेयन का यह कदम चंडीगढ़ प्रशासन में एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां आम नागरिकों की पहुंच सीधे शीर्ष अधिकारियों तक सुनिश्चित की जा रही है।
