राम मंदिर चंदा चोरी केस में बड़ा खुलासा: CCTV फुटेज से छेड़छाड़ के मिले सबूत, SIT ने टिन्नू यादव से की लंबी पूछताछ

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श्रीराम मंदिर की दान की राशि में हेरफेर के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की तफ्तीश तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें। जांच टीम ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है। वहीं, निगरानी करने वाले असल जिम्मेदार एसआईटी के सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। उनके पास से रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन संदिग्धों ने कई नामों का खुलासा किया है, जिनको इस खेल में शामिल बताया है। एसआईटी ने उनके बयानों की तस्दीक कर रही है। अब सवाल है कि क्या एसआईटी की जांच के बीच एफआईआर दर्ज की जाएगी या जांच पूरी होने के बाद। या केस दर्ज ही नहीं होगा…ये सवाल अभी भी बना हुआ है।

दान की गिनती प्रक्रिया में बैंक की अहम भूमिका रहती थी। बैंक कर्मियों की मौजूदगी में ही गिनती होती थी। एसआईटी की शुरुआती जांच में बैंक की भी लापरवाही सामने आई है। प्रक्रिया में उनकी भूमिका भी संधिग्ध है। हालांकि जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक बैंक कर्मी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे, इसलिए वह हस्ताक्षेप नहीं कर पाते थे।

मामले में देश के कई पूर्व डीजीपी का कहना है कि ये गंभीर आपराधिक कृत्य है। इसमें तत्काल केस दर्ज करना चाहिए।  यही मांग आज देश की जनता भी कर रही है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, रोजाना लाखों-करोड़ों का दान आता है। बताया जाता है कि सोना-चांदी, रत्न व हीरे जड़े आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। ये सामान्य अपराध नहीं है बल्कि महापाप है।

पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि दान राशि के गबन का जो मामला सामने आया है, वह एक आपराधिक घटना है। इसमें केस दर्ज होना चाहिए। जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाना चाहिए।

जांच के बीच ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर 11 माह में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसी अवधि में दान पेटियों से चोरी और दानराशि में गड़बड़ी का मामला सामने आ गया।

जानकारी के अनुसार, 21 मार्च को हुई ट्रस्ट की बैठक में एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक की आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया गया था। इसी विवरण में सुरक्षा मद पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद दान पेटियों से कथित धन और आभूषणों की चोरी का मामला सामने आने के बाद अब सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

जमीन खरीद में भी भारी अनियमितता के आरोप 
अयोध्या। उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने   राम मंदिर ट्रस्ट पर जमीन खरीद में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट ने बाजार और सरकारी मूल्यांकन से कई गुना अधिक कीमत पर जमीनों की खरीद की है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

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