AAP को बड़ा झटका: कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज, 14 मई को अगली सुनवाई

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 पंजाब की राजनीति में हलचल मचाने वाले 100 करोड़ के फर्जी जीएसटी बिल और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय की है।

प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को चंडीगढ़ स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर छापेमारी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें देर रात गुरुग्राम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 16 मई तक (7 दिन) की ED रिमांड पर भेज दिया गया है। अरोड़ा ने इसी रिमांड और अपनी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान संजीव अरोड़ा के वकील ने दलील दी कि उनकी फर्म पूरी तरह रजिस्टर्ड है और सभी मोबाइल फोन की खरीद के पक्के बिल मौजूद हैं। कंपनी ने नियमानुसार जीएसटी का भुगतान किया है और सभी लेनदेन बैंक खातों व कैश बुक से मेल खाते हैं। उन्होंने किसी भी तरह के फ्रॉड से इनकार किया। वहीं, ED के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। बचाव पक्ष ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘अर्जेंट’ सुनवाई की मांग की, जिस पर अदालत ने 14 मई की तारीख मुकर्रर की।

यह मामला 5 मई 2026 को दर्ज हुई एक नई FIR से जुड़ा है। ED का आरोप है कि अरोड़ा की कंपनी ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ ने दिल्ली की फर्जी फर्मों से करोड़ों के मोबाइल फोन की खरीद दिखाई। आरोप है कि इन फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट और जीएसटी रिफंड लिया गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि दुबई (UAE) जैसे देशों से ‘राउंड ट्रिपिंग’ के जरिए अवैध धन भारत लाया जा रहा था।

संजीव अरोड़ा लुधियाना वेस्ट से विधायक और पंजाब सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में से एक थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ने उनके विभाग तीन अन्य मंत्रियों को सौंप दिए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि विपक्षी दल इसे सरकारी खजाने की बड़ी लूट करार दे रहे हैं।

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