कार्ति चिदंबरम को झटका: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने CBI केस से बनाई दूरी, बढ़ी सियासी हलचल

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दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें डियाजियो स्कॉटलैंड से जुड़े कथित रिश्वतखोरी प्रकरण में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने की मांग की गई है।

मामला सूचीबद्ध होने पर न्यायमूर्ति शर्मा ने इसे सुनने से इनकार कर दिया। अब यह याचिका मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार किसी अन्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

चिदंबरम ने 1 जनवरी 2025 को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। इस एफआईआर में आरोप है कि उन्होंने डियाजियो स्कॉटलैंड को उसकी व्हिस्की की शुल्क-मुक्त बिक्री पर लगे प्रतिबंध में राहत दिलाने के लिए लोक सेवकों को प्रभावित करने की कोशिश की।

अपनी याचिका में चिदंबरम का कहना है कि प्रारंभिक जांच के दौरान उन्हें कभी बुलाया नहीं गया और एफआईआर दर्ज होने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी दलील दी है कि मामले में करीब दो दशक की अस्पष्ट देरी हुई है, क्योंकि आरोप 2004 से 2010 के बीच के हैं, जबकि एफआईआर 2025 में दर्ज की गई। चिदंबरम ने कहा कि उन पर न तो रिश्वत मांगने का आरोप है और न ही अवैध लाभ लेने का, इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ मामला नहीं बनता।

यह पहला मौका नहीं है जब न्यायमूर्ति शर्मा ने चिदंबरम से जुड़े किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया हो। इससे पहले भी उन्होंने कथित चीनी वीजा घोटाले से संबंधित मामले में उनकी याचिका से खुद को अलग कर लिया था।
उक्त मामले में चिदंबरम ने सीबीआई की विशेष अदालत के 23 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 2011 में चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने में कथित अनियमितताओं को लेकर उन पर आपराधिक साजिश और रिश्वत से जुड़े आरोप तय किए गए थे। सीबीआई का आरोप है कि गृह मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब 250 चीनी श्रमिकों को पंजाब की एक बिजली परियोजना के लिए परियोजना वीजा जारी किए गए।
इसके अलावा, न्यायमूर्ति शर्मा ने हाल ही में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमसीओसीए) के तहत दर्ज मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बालियान की जमानत याचिका पर भी सुनवाई से खुद को अलग किया है। बालियान को दिसंबर 2024 में जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एमसीओसीए के तहत फिर से गिरफ्तार किया था। उन पर जबरन वसूली और हथियार तस्करी से जुड़े गिरोहों में शामिल होने के आरोप हैं।
वहीं, न्यायमूर्ति शर्मा फिलहाल सीबीआई द्वारा दायर एक लंबित आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को अब निरस्त हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बरी किए जाने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।

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