ED ने हरियाणा, पंजाब में 10 से ज़्यादा जगहों पर छापे मारे, 145 करोड़ रुपये के FD ‘घोटाले’ में एक्शन

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को बताया कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कई जगहों पर तलाशी ली है. ये मामला हरियाणा में कोटक महिंद्रा बैंक की एक ब्रांच में जमा पंचकूला नगर निगम की फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) में कथित तौर पर 145 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा है.

145 करोड़ का घोटाला : बुधवार को की गई इन छापेमारी में चंडीगढ़ और पंचकूला (हरियाणा) में एक दर्जन जगहों के अलावा, पंजाब के ज़ीरकपुर, डेरा बस्सी और राजपुरा (पटियाला ज़िला) भी शामिल थे. ED का यह मामला, जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है, मार्च में हरियाणा सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एक FIR से जुड़ा है. इस FIR में पंचकूला के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की ब्रांच में जमा पंचकूला नगर निगम की 145 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉज़िट के गबन के आरोप लगाए गए थे.

दस्तावेज किए गए जब्त : तलाशी के दौरान कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह, उक्त ब्रांच के पूर्व कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव, नगर निगम के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक और कुछ अन्य लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई. ED ने एक बयान में कहा कि छापेमारी के दौरान उसे “आपत्तिजनक” दस्तावेज़ मिले हैं, जिन्हें ज़ब्त कर लिया गया है. इस जांच के सिलसिले में हरियाणा ACB ने सिंह, राघव और चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया था.

आपराधिक गठजोड़ मिला : ED ने बताया कि उसे नगर निगम और बैंक अधिकारियों के साथ-साथ कुछ निजी व्यक्तियों के बीच एक गहरा “आपराधिक गठजोड़” मिला है, जिन्होंने सरकारी फंड को हड़पने की साज़िश रची थी. शुरुआती जांच में पता चला है कि राघव ने सिंह के साथ मिलकर और विकास कौशिक के सहयोग से, “जाली” और “फर्जी” अधिकार-पत्रों (authorization documents) का इस्तेमाल करके पंचकूला नगर निगम के नाम पर दो बैंक खाते खोले थे. ED ने बताया कि नगर निगम के नाम पर बनाए गए जाली और फर्जी फंड ट्रांसफर अधिकार-पत्रों का इस्तेमाल करके, निगम के असली खातों में जमा फंड को इन “अनधिकृत” खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था.

गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर की गई रकम : एजेंसी ने बताया कि बैंक अधिकारियों ने निगम के नाम पर मिले “फर्जी” और “जाली” अधिकार-पत्रों के जवाब में, लेन-देन के लिए मंज़ूरी मांगने हेतु अनधिकृत ईमेल ID का इस्तेमाल किया था. इसमें आगे कहा गया कि “गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर” किए गए पैसे, जो बिना अनुमति वाले बैंक खातों में जमा थे, बाद में रजत दह्रा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसरों को ट्रांसफर कर दिए गए. ये पैसे “घुमा-फिराकर” वापस पुष्पेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर को भेज दिए गए. आरोप है कि कुछ पैसे रियल एस्टेट कंपनियों और निजी व्यक्तियों को भी ट्रांसफर किए गए. ED ने दावा किया कि आरोपियों ने नगर निगम को “जाली” फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) रसीदें दीं, जिनमें 16 FD में 145.03 करोड़ रुपये के निवेश और 158.02 करोड़ रुपये की मैच्योरिटी वैल्यू दिखाई गई थी.

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