सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ में रेहड़ी-पटरी (स्ट्रीट वेंडर्स) को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि उन्हें अचानक या मनमाने ढंग से हटाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये लोग सिर्फ सड़क किनारे दुकान लगाने वाले नहीं, बल्कि अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले आम नागरिक हैं, इसलिए उनकी आजीविका का सम्मान जरूरी है।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी, जिसमें प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह फैसला मलकित सिंह बनाम चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश मामले में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को व्यापार और रोजगार करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह खुला नहीं है। बिना नियमों के सार्वजनिक जगहों पर दुकानें लगाने से आम लोगों को परेशानी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए सरकार का काम दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
सुनवाई के दौरान प्रशासन ने बताया कि 1 अगस्त से 30 नवंबर 2025 के बीच अवैध वेंडर्स के खिलाफ 1024 चालान काटे गए और केवल लाइसेंसधारी वेंडर्स को ही काम करने की अनुमति दी गई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ हटाना समाधान नहीं है। यदि किसी वेंडर को हटाया जाता है, तो उसे दूसरी जगह काम करने का अवसर देना जरूरी है। बिना उचित व्यवस्था के हटाने की कार्रवाई वेंडर्स के साथ अन्याय मानी जा सकती है, इसलिए प्रशासन को सख्ती के बजाय संतुलित और समझदारी भरा रवैया अपनाना चाहिए।