पंचकूला में कुत्तों के टीकाकरण का टेंडर तीसरी बार जारी, रोज सामने आ रहे 20 डॉग बाइट के मामले
पंचकूला शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण का काम एक बार फिर अटक गया है। पहले टेंडर में कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई, जबकि दूसरी बार की प्रक्रिया कागजी खामियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। अब पंचकूला नगर निगम (MC) ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम के लिए तीसरी बार टेंडर जारी किया है, जिसकी बिड 9 अक्टूबर को खोली जाएगी। शहर में यह प्रक्रिया ऐसे समय अटकी है, जब डॉग बाइट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक रोजाना 20 से 22 लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एबीसी रूल्स 2023 के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और प्रबंधन के लिए एजेंसी का चयन जरूरी है।
नगर निगम की नई टेंडर शर्तों के मुताबिक चुनी गई एजेंसी को शुरुआत में एक साल के लिए काम दिया जाएगा। काम संतोषजनक रहने पर ठेका एक साल और बढ़ाया जा सकेगा। एजेंसी को एबीसी रूल्स 2023, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अस्पताल और बच्चों के पार्क जैसे संवेदनशील स्थानों से पकड़े गए कुत्तों को नोडल अधिकारी की मंजूरी के बाद तुरंत शेल्टर होम भेजना होगा। वहां उनकी जांच के बाद नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण किया जाएगा। पहचान के लिए कुत्तों की ईयर-नॉचिंग भी की जाएगी।
हिंसक, रेबीज से पीड़ित या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों के इलाज की व्यवस्था भी नियमों के मुताबिक होगी। ऐसे कुत्तों का उपचार पशु चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में किया जाएगा। निगम एजेंसी को डॉग शेल्टर, ऑपरेशन थिएटर और बिजली की सुविधा उपलब्ध कराएगा। नई व्यवस्था में निगरानी और रिकॉर्डिंग के लिए भी कई शर्तें रखी गई हैं। कुत्ता पकड़ते समय स्थानीय निवासी का नाम, पता, फोन नंबर और हस्ताक्षर दर्ज करने होंगे। एजेंसी को कुत्तों को पकड़ने, इलाज, नसबंदी और वापस छोड़ने का रोजाना रजिस्टर बनाना होगा। कुत्तों को पकड़ने वाले सभी वाहनों में GPS चालू रखना अनिवार्य होगा। कुत्ते से जुड़ी कोई शिकायत 6 घंटे से अधिक समय तक अनसुलझी रहती है तो एजेंसी पर ₹1,000 प्रति शिकायत जुर्माना लगाया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान निकाले गए अंगों को भी सुरक्षित रखना होगा और हर महीने निगम अधिकारी को सौंपना होगा। इन शर्तों का मकसद एजेंसी की जवाबदेही तय करने के साथ पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाए रखना है।
पंचकूला में नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया में देरी का असर लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता के रूप में भी सामने आ रहा है। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक रोजाना 20 से 22 कुत्ते के काटने के मामले सामने आ रहे हैं। इस साल के शुरुआती छह महीनों में अस्पताल में 7,600 डॉग बाइट केस दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले पूरे साल पंचकूला में कुत्ते के काटने के 14,230 मामले सामने आए थे। यानी इस साल के पहले छह महीनों में ही अस्पताल में दर्ज मामले पिछले साल के पूरे आंकड़े के आधे से ज्यादा पहुंच चुके हैं। डॉग बाइट के मामलों में लोगों को समय पर उपचार और रेबीज रोधी टीकाकरण की जरूरत पड़ती है, इसलिए नसबंदी और वैक्सीनेशन की व्यवस्था सुचारु रहना शहर के लिए अहम है।
नगर निगम का पिछला ठेका 2,000 कुत्तों की नसबंदी के लक्ष्य के साथ दिया गया था। जून 2026 में लक्ष्य पूरा होने के साथ यह ठेका खत्म हो गया और एजेंसी को प्रति कुत्ता ₹1,472 का भुगतान किया गया था। लक्ष्य पूरा होने के बावजूद डॉग बाइट के मामले कम नहीं हुए हैं। अब निगम के सामने तीसरी टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर नई एजेंसी तय करने की चुनौती है। 9 अक्टूबर को बिड खुलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद एजेंसी को नसबंदी, रेबीज टीकाकरण, कुत्तों की पहचान और रिकॉर्ड रखने का काम करना होगा। शहर के लोगों के लिए अहम बात यही होगी कि नई एजेंसी का चयन कितनी जल्दी होता है और जमीनी स्तर पर काम कब शुरू होता है।
