सेक्टर 27 जैन मंदिर के साथ वाला पार्क बनेगा ‘अहिंसा वाटिका’, राज्यपाल ने दिया आश्वासन

0

चंडीगढ़:  श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के दसवें दिन आज उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक भाव से आराधना की गई। प्रातःकालीन धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत नियमित रूप से प्रातः 6:30 बजे हुई। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं शांतिधारा में भाग लेकर आत्मशुद्धि एवं संयम का संकल्प लिया।

प्रातःकाल मूलनायक भगवान का प्रथम अभिषेक श्री शैलेंद्र जैन द्वारा किया गया,  द्वितीय अभिषेक श्रीमती दमयंती जैन डॉ. संयोग जैन ने किया। प्रथम शांतिधारा श्री निर्मल कुमार जैन द्वारा तथा द्वितीय शांतिधारा डॉ. सर्वेश जैन, श्रीमती नमिता जैन द्वारा की गई।मंदिर हॉल में आयोजित शांतिधारा श्री करुण जैन एवं श्रीमती सौम्या जैन द्वारा की गई।

विधान के अंतर्गत सौधर्मेंद्र की भूमिका श्रीमती कविता जैन एवं श्री ऋषभ जैन ने निभाई। कुबेर इंद्र की भूमिका श्री अमित जैन एवं श्रीमती प्रीति जैन ने निभाई। , जबकि ईशान इंद्र की भूमिका श्री नवरत्न जैन एवं श्रीमती शकुंतला जैन ने निभाई।
आज का दिन भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को निर्वाण लड्डू अर्पित किया गया। मुख्य लाडू डॉ सर्वेश जैन नमिता जैन ने अर्पित किया। आज की पूजन सामग्री श्री नरेश जैन, श्री नितिन जैन एवं श्रीमती प्रीति जैन द्वारा प्रदान की गई। श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था श्री नवरत्न जैन परिवार द्वारा की गई।

संध्या कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 3:00 बजे हुआ। मंदिर परिसर में भगवान की प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य परिक्रमा की गई। पालकी को श्री राजेंद्र प्रसाद जैन, श्री प्राचीश जैन, श्री नितिन जैन एवं श्री मोहित जैन ने अपने कंधों पर उठाया।

 

परिक्रमा के पश्चात पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक महामहिम श्री गुलाब चंद कटारिया अपनी धर्मपत्नी श्रीमती अनीता कटारिया के साथ  शाम 4:54 बजे मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान के दर्शन किए तथा परिक्रमा के पश्चात भगवान का अभिषेक देख धार्मिक आयोजन में भाग लिया

इस मौके पर दिगंबर जैन समाज ने मंदिर के साथ लगते पार्क का नाम ‘अहिंसा वाटिका’ रखने की मांग रखी, जिस पर राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि जल्द ही नगर निगम को निर्देश जारी कर पार्क का नाम अहिंसा वाटिका किया जाएगा।

जैन समाज के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इस पार्क में ऐसे वृक्ष लगाए जाएंगे जिनके नीचे जैन तीर्थंकरों ने तपस्या की थी। साथ ही चंडीगढ़ से श्री महावीर जी के लिए सीधी ट्रेन और श्री महावीर जी स्टेशन पर 2 मिनट के ठहराव की मांग भी रखी गई, जिस पर राज्यपाल ने रेल मंत्री से बात करने और जल्द दिल्ली जाकर मिलने की बात कही।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि दशलक्षण धर्म को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर जीवन में अपनाएं। उन्होंने सभी से क्षमायाचना करते हुए कहा कि यदि उनके किसी कार्य से किसी को ठेस पहुंची हो तो वे क्षमाप्रार्थी हैं।

इस मौके पर पूर्व सांसद एवं  सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन, मंदिर प्रधान धरम बहादुर जैन, आदर्श जैन, संत कुमार जैन, नवरत्न जैन, JITO चेयरमैन लोकेश जैन, वाइस चेयरमैन महावीर जैन, संजय जैन, भाजपा पूर्व उपाध्यक्ष कैलाश जैन गुणवंत राय जैन, श्री एम.के. जैन, श्री हरीश चंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल रहे। श्री दिगम्बर जैन सोसाइटी कार्यकारिणी से नीरज जैन ,करूँ जैन ,रमेश जैन डॉ सर्वेश जैन उपस्थित रहे। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में भाग लिया। ।

श्रीमती अनीता जैन का श्रीमती मेम लता जैन एवं श्रीमती मनीषा जैन ने स्वागत किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने दशलक्षण धर्म की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशलक्षण धर्म में निहित आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखते हुए उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उनहोंने विशेष रूप से उत्तम क्षमा के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दशलक्षण पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और अपने भीतर के दोषों को पहचानकर उनमें सुधार करने का अवसर है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तम क्षमा का पर्व मानव जीवन में अत्यंत उच्च महत्व रखता है, क्योंकि इस अवसर पर हम अपने द्वारा हुई भूलों और गलतियों के लिए दूसरों से क्षमा मांगते हैं तथा दूसरों को भी क्षमा करने का भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगना व्यक्ति को छोटा नहीं बनाता, बल्कि उसके भीतर विनम्रता और आत्मिक शक्ति को दर्शाता है।

भावपूर्ण शब्दों में उन्होंने चंडीगढ़ एवं पंजाब के सभी नागरिकों से भी क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि यदि उनके किसी कार्य, व्यवहार, निर्णय या उनके किसी शब्द से जाने-अनजाने किसी व्यक्ति को ठेस पहुंची हो या किसी को दुःख हुआ हो, तो वे उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। उन्होंने कहा कि क्षमा का यह भाव समाज में आपसी सद्भाव, भाईचारे और शांति को मजबूत करता है।उन्होंने दिगम्बर जैन सोसाइटी द्वारा दशलक्षण धर्म के दसों लक्षणों के आध्यात्मिक एवं नैतिक संदेश को समाज तक पहुंचाने तथा लोगों को इन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने दिगम्बर जैन सोसाइटी द्वारा समाज में दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों को समझाने तथा लोगों को इन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

उनके इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, क्षमाशीलता और अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा दी।
राज्यपाल के आगमन के दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के पश्चात भगवान की प्रतिमा को पुनः मुख्य मंदिर में लाकर वेदी पर विराजमान किया गया।

दशलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने त्याग को केवल वस्तुओं के परित्याग तक सीमित न रखते हुए मोह, ममता, अहंकार एवं आसक्ति को कम करने और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

RAGA NEWS ZONE Join Channel Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *