15 दिन यहीं रहकर चुनावी कमान संभालूंगा’ : अमित शाह ने ममता को दी सीधी चुनौती

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। ऐसे में सियासी सरगर्मी चरम पर है।हाल ही में BJP और TMC के बीच टक्कर देखने को मिली है। बंगाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने वहां की सीएम ममता बनर्जी को ललकारते हुए कहा है कि वे बंगाल में चुनाव की कमान को संभालेंगे। इसी के चलते अगले 15 दिनों तक वहीं रहेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि अमित शाह बंगाल में बीजेपी के नेता  शुभेंदु अधिकारी के नामांकन के लिए पहुंचे हैं।

शक्ति प्रदर्शन में बदली नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी के भवानीपुर से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया को बृहस्पतिवार को एक ‘हाई-वोल्टेज’ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया और दावा किया कि पश्चिम बंगाल में परिवर्तन का ”शॉर्टकट” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनकी अपनी सीट पर हराना है। शाह ने कहा कि वैसे तो भाजपा को बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए 170 सीट जीतनी होंगी लेकिन केवल भवानीपुर में अधिकारी की जीत से ही राज्य की राजनीति में अपने आप परिवर्तन आ जाएगा। शाह ने दक्षिण कोलकाता में हाजरा क्रॉसिंग से रोड शो शुरू करने से पहले एक रैली को संबोधित करते हुए भवानीपुर के मुकाबले को केवल एक और विधानसभा सीट की लड़ाई के रूप में नहीं, बल्कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने के लिए भाजपा के अभियान के प्रतीकात्मक केंद्रबिंदु के रूप में प्रस्तुत किया। शाह ने रैली में मौजूद लोगों से कहा, ”पश्चिम बंगाल में परिवर्तन होगा लेकिन भवानीपुर में परिवर्तन होना चाहिए या नहीं?” उन्होंने कहा, ”मैं भवानीपुर के लोगों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि पूरे राज्य की मुक्ति के लिए हमारे उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को भारी अंतर से जीत दिलाएं।”

शाह ने कहा कि उन्होंने अधिकारी को नंदीग्राम के अपने पारंपरिक गढ़ तक सीमित रहने के बजाय मुख्यमंत्री के गढ़ भवानीपुर से चुनाव लड़ने के लिए खुद राजी किया। शाह ने कहा, ”शुभेंदु दा नंदीग्राम से चुनाव लड़ना चाहते थे। मैंने उनसे कहा कि सिर्फ नंदीग्राम नहीं, आपको ममता बनर्जी के घर में घुसकर उन्हें वहीं हराना है।’ उन्होंने लोगों से कहा कि 2021 में सत्ता में लौटने के बावजूद बनर्जी नंदीग्राम में अधिकारी से हार गई थीं। कभी ममता बनर्जी के निकटतम सहयोगियों में शामिल रहे अधिकारी दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल हो गए थे। शाह ने कहा, ”उन्होंने बंगाल में सरकार बनाई लेकिन नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से हार गईं। इस बार वह केवल पूरे राज्य में ही नहीं, भवानीपुर में भी हारेंगी।” भवानीपुर एक दशक से अधिक समय से बनर्जी का राजनीतिक गढ़ रहा है। उन्होंने पहली बार 2011 में इस सीट से चुनाव लड़ा था और वाम मोर्चे को हराकर मुख्यमंत्री बनी थीं। वह 2021 में नंदीग्राम में हार के बाद भवानीपुर से आसानी से उपचुनाव जीतकर फिर विधानसभा पहुंचीं और उन्होंने इस सीट को अपने सबसे सुरक्षित राजनीतिक क्षेत्र के रूप में फिर स्थापित किया। भाजपा भवानीपुर में बनर्जी के खिलाफ अधिकारी को मैदान में उतारकर कोलकाता के केंद्र में नंदीग्राम के नाटकीय घटनाक्रम को दोहराने और इस मुकाबले को बंगाल के दो सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक चेहरों के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई में बदलने की कोशिश कर रही है। हाजरा क्रॉसिंग से शुरू हुए रोड शो के दौरान शाह और अधिकारी प्रचार वाहन के ऊपर एक साथ खड़े थे। इस दौरान भाजपा समर्थकों ने बंगाल में ”परिवर्तन” के नारे लगाए। शाह ने भवानीपुर को राज्य में सत्ता परिवर्तन के प्रवेशद्वार के रूप में बार-बार पेश किया। उन्होंने 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा, ”हम एक के बाद एक सीट जीतेंगे और 170 तक पहुंचेंगे। तभी परिवर्तन होगा।” उन्होंने कहा, ”लेकिन मेरे पास एक ‘शॉर्टकट’ है। अगर भवानीपुर के लोग हमें यह एक सीट जिता दें तो परिवर्तन अपने आप हो जाएगा।” ”शार्टकट” वाली टिप्पणी से तात्पर्य है कि अपनी ही सीट पर बनर्जी की हार तृणमूल के लिए मनोवैज्ञानिक झटका होगी।

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