Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 12 जून 2026

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अंग्रेजी तारीख 12 जून 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, ग्रीष्म ऋतु। राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक। द्वादशी तिथि सायं 07 बजकर 36 मिनट तक उपरांत त्रयोदशी तिथि का आरंभ। अश्विनी नक्षत्र प्रातः 06 बजकर 28 मिनट तक उपरांत भरणी नक्षत्र का आरंभ। अतिगण्ड योग रात्रि 09 बजकर 26 मिनट तक उपरांत सुकर्मा योग का आरंभ। कौलव करण प्रातः 09 बजकर 10 मिनट तक उपरांत तैतिल करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात मेष राशि पर संचार करेगा।

महत्वपूर्ण विवरण तिथि कृष्ण द्वादशी – सायं 07:36 बजे तक, फिर त्रयोदशी योग अतिगण्ड – रात्रि 09:26 बजे तक, फिर सुकर्मा करण कौलव – प्रातः 09:10 बजे तक करण तैतिल – सायं 07:36 बजे तक, फिर गरज सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय प्रातः 05:23 बजे सूर्यास्त का समय सायं 07:19 बजे चंद्रोदय का समय मध्यरात्रि बाद 03:15 बजे (13 जून) चंद्रास्त का समय सायं 04:18 बजे आज के व्रत त्योहार शुक्र अधिक कृष्ण प्रदोष व्रत।

आज का शुभ मुहूर्त 12 जून 2026 : अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक। अमृत काल रात्रि 11 बजकर 46 मिनट से मध्यरात्रि बाद 01 बजकर 12 मिनट (13 जून) तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक। आज का अशुभ मुहूर्त 12 जून 2026 : सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक गुलिक काल रहेगा दोपहर 03:30 से 05:00 बजे तक यमगंड रहेगा।

आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। अश्विनी नक्षत्र: प्रातः 06:28 बजे तक स्थान: 0° मेष राशि से 13°20’ मेष राशि तक नक्षत्र स्वामी: केतु राशि स्वामी: मंगलदेव देवता: अश्विनी कुमार (देवताओं के चिकित्सक) प्रतीक: घोड़े का सिर सामान्य विशेषताएं: इस नक्षत्र में जन्मे लोग बहुत आकर्षक, सुंदर और आभूषण-प्रेमी होते हैं। इनकी बुद्धि तेज होती है और ये स्वभाव से शांत, साहसी तथा पूरी तरह से बलवान व स्वस्थ होते हैं। इनमें अद्भुत फुर्ती और आत्मविश्वास होता है, जिसके कारण ये खेल-कूद और साहसिक कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं।

शुक्र अधिक कृष्ण प्रदोष व्रत 2026 त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जून, शाम 07:36 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 13 जून, दोपहर 04:07 बजे प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 07:36 से रात 09:20 बजे हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को प्रदोष व्रत रखा जाता है। देखा जाए तो यह तिथि जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में आती है, तभी व्रत का दिन निश्चित होता है। विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी और प्रदोष समय का मिलना शिव पूजा के लिए अत्यंत सटीक माना गया है। अधिक मास में आने से इसका महत्व और बढ़ जाता है। यह पावन उपवास जातक को जीवन में सौंदर्य, वैवाहिक सुख और धन-समृद्धि प्रदान करने वाला संकेत देता है। महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष रूप से शुभ फल देने वाला माना जाता है। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और घर में सुख का संचार होता है। आज का उपाय : आज प्रदोष काल में भगवान शिव का शहद और जल से अभिषेक करें। शुक्रवार और प्रदोष के इस शुभ योग पर सफेद वस्त्र, मिश्री या दूध का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह कार्य धार्मिक नियमों के सुंदर और सफल संपादन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।

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