भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, दिल्ली में आज शुरू होगी निर्णायक बैठक

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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए आज से राजधानी नई दिल्ली में चार दिवसीय उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता की आज से शुरुआत होगी. अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में वॉशिंगटन का एक प्रतिनिधिमंडल आज भारत पहुंचेगा. 1 जून से 4 जून 2026 तक चलने वाली इस गहन द्विपक्षीय बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव और देश के मुख्य व्यापार वार्ताकार दर्पण जैन कर रहे हैं.

इस ऐतिहासिक आमने-सामने की बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित महत्वाकांक्षी ‘द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ (BTA) के तहत एक अंतरिम व्यापार सौदे को अंतिम रूप देना है.

हाल ही में आईआईटी दिल्ली में आयोजित ‘यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव’ कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस वार्ता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था. उन्होंने साझा किया कि अप्रैल 2026 में भारतीय दल के वाशिंगटन दौरे के दौरान इस व्यापार सौदे का 99 प्रतिशत हिस्सा फाइनल कर लिया गया था. अब इस चार दिवसीय दौर में दोनों पक्ष बचे हुए अंतिम 1 प्रतिशत तकनीकी और कानूनी मुद्दों को सुलझाएंगे. राजनयिकों को उम्मीद है कि अगले कुछ ही हफ्तों या महीनों के भीतर इस ऐतिहासिक समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे.

यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के टैरिफ परिदृश्य में बड़े नीतिगत बदलाव आए हैं, जिसके चलते दोनों पक्ष समझौते के पुराने ढांचे की समीक्षा कर रहे हैं. मुख्य एजेंडे में शामिल हैं.

बाजार पहुंच: सहमत ढांचे के तहत, भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों सहित कृषि उत्पादों जैसे सूखे मेवे, ताजे फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स पर आयात शुल्क को कम या पूरी तरह समाप्त करने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाएगा.

बंदरगाहों और सीमाओं पर कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए कस्टम प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर सहमति बनाई जाएगी.

 वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और बाधा रहित बनाने के लिए दोनों महाशक्तियां रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगी.

पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच माल और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से उछलकर 220 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है. अमेरिकी प्रशासन अब भारत को न केवल एक बड़ा बाजार, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए एक अनिवार्य रणनीतिक सहयोगी मान रहा है. इस अंतरिम समझौते के संपन्न होने से दोनों देशों के घरेलू उद्योगों, कृषि निर्यातकों और उपभोक्ताओं को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है.

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