समझौता करो, नहीं तो तबाह कर देंगे; UN में ट्रंप ने ईरान को दी धमकी
ट्रंप ने मंगलवार को UNGA को संबोधित करते हुए ईरान को अमेरिका का बड़ा खतरा और दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा मददगार बताया। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि जब तक तेहरान जहाजों पर हमले बंद न करे,
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ( UNGA ) को संबोधित किया। ट्रंप का भाषण मुख्य रूप से ईरान पर केंद्रित रहा। उन्होंने तेहरान को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा और दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा मददगार बताया। ट्रंप ने कहा कि ईरान अभी भी अमेरिका के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे ईरान को पूरी तरह आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ दें। उनका कहना था कि जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, परमाणु इरादे नहीं छोड़ता और आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक इस दबाव को जारी रखना चाहिए और रखेंगे।
ट्रंप ने अपने भाषण में बार-बार एक ‘बड़े फैसले’ की बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे एक बड़ा फैसला लेना है। जब डील हो जाएगी, तो क्या हम पहले से कहीं बेहतर देश बनाएंगे? शायद मध्य पूर्व या दुनिया के सबसे महान देशों में से एक। या मैं खत्म कर दूं? और क्या मैं उन्हें जल्दी खत्म कर दूं, ताकि उन्हें लोगों और देशों को मारने और बर्बाद करने का मौका ही न मिले? क्या मैं उन्हें ऐसी जगह धकेल दूं जहां बचने का कोई मौका न हो और भविष्य में महानता व इज्जत की कोई उम्मीद न रहे? यह बयान उन बयानों के कुछ दिन बाद आया है, जिनमें ट्रंप ने एक्सियोस को बताया था कि ईरान युद्ध में वे ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां बड़े हमले फिर से शुरू करने हैं या नहीं, यह तय करना है। यूएन मंच पर उन्होंने इसी मुद्दे को और खोलकर रख दिया और दुनिया को संकेत भी दे दिया कि आने वाले समय में क्या-क्या हो सकता है।
संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही सवाल का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने के बाद अमेरिका ईरान के साथ समझौता कर सकता है। ट्रंप के मुताबिक, मुझे लगता है हम चुनाव के ठीक बाद डील कर लेंगे, क्योंकि उनके लिए ऐसा न करना समझदारी नहीं है। वे यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि मैं मिडटर्म चुनाव में कैसा करता हूं। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान फिलहाल इंतजार की नीति पर है और अमेरिकी घरेलू राजनीति का नतीजा देखना चाहता है।
बता दें कि UNGA में जब ट्रंप ने पिछले छह महीनों में तेहरान के खिलाफ हुए सैन्य हमलों का जिक्र शुरू किया, तो ईरानी प्रतिनिधिमंडल सभागार से बाहर चला गया। इस दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे टकराव का बचाव किया। उन्होंने कहा कि तेहरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध करने की कोशिश के बाद बड़े पैमाने पर आर्थिक दिक्कतें पैदा हुई हैं। उनके अनुसार, यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा था, इसलिए अमेरिका को सख्त रुख अपनाना पड़ा।
ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि इस्लामिक रिपब्लिक के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि वे पक्के वादे के साथ यह सुनिश्चित करेंगे। इस दौरान ट्रंप के ने कहा कि इतिहास के सबसे अनोखे देश के राष्ट्रपति के तौर पर मुझे खतरों को किसी और दिन के लिए टालने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं समस्याओं को बढ़ने देने में विश्वास नहीं करता। उन्होंने पिछले साल महासभा में दिए अपने दावे की ओर भी इशारा किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु क्षमता को ‘खत्म’ कर दिया है। इस बार भी उनका संदेश यही था कि परमाणु खतरे को अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा।
ट्रंप ने अपने भाषण में साफ-साफ कहा कि ईरान पर आर्थिक घेराबंदी और कूटनीतिक अलगाव बढ़ाया जाए। इसके साथ ही सैन्य विकल्प पूरी तरह बंद नहीं होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर तेहरान हमले बंद करे, परमाणु कार्यक्रम छोड़े और आतंकवाद को मदद देना बंद करे, तो बेहतर समझौते का रास्ता खुला रह सकता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो ट्रंप ने यूएन मंच का इस्तेमाल ईरान को चेतावनी देने के लिए किया। साथ ही सहयोगी देशों से समर्थन मांगने और घरेलू चुनाव से जोड़कर अपनी रणनीति बताने के लिए किया।
