रोक के बावजूद कैंबवाला में निर्माण पर हाईकोर्ट हैरान, पूछा—किसने खड़ी कीं नई चारदीवारियां?
चंडीगढ़, 1 सितम्बर। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से निर्माण पर रोक के बावजूद कैंबवाला क्षेत्र में कथित तौर पर नए निर्माण और चारदीवारियां खड़ी किए जाने का मामला सामने आने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है। खास बात यह है कि सुनवाई से महज चार दिन पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया था कि राजस्व अधिकारियों के निरीक्षण में मौके पर किसी तरह का नया निर्माण नहीं मिला। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट और वीडियो फुटेज ने मौके की स्थिति को इससे अलग बताया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने लोकल कमिश्नर अधिवक्ता नितिन कौशल की ओर से पेश किए गए वीडियो फुटेज को देखने के बाद सवाल उठाया कि जब डिवीजन बेंच पहले ही निर्माण पर रोक लगा चुकी थी तो इसके बावजूद मौके पर नई चारदीवारियां और अन्य निर्माण कैसे हो गए।
खंडपीठ ने टिप्पणी की, “हम हैरान हैं कि डिवीजन बेंच की रोक के बावजूद अधिकारियों ने इस तरह के निर्माण कैसे होने दिए।”
मामले की सुनवाई के दौरान 27 अगस्त को यूटी प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया था कि राजस्व अधिकारियों ने कैंबवाला क्षेत्र का निरीक्षण किया है और वहां कोई नया निर्माण नहीं पाया गया। हालांकि, निर्माण होने के आरोपों और प्रशासन की रिपोर्ट में अंतर सामने आने के बाद अदालत ने वास्तविक स्थिति की जांच के लिए अधिवक्ता नितिन कौशल को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था।
लोकल कमिश्नर ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। इसके साथ ही वीडियो फुटेज भी प्रस्तुत किया गया। फुटेज देखने के बाद अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निर्माण की अनुमति दिए जाने को लेकर जवाब मांगा।
हाईकोर्ट ने राजस्व अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने विशेष रूप से कहा है कि हलफनामे में उन लोगों के नाम बताए जाएं, जिन्होंने “डिवीजन बेंच के फैसले के बावजूद” नई चारदीवारियों का निर्माण किया।
अदालत ने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अनधिकृत निर्माण को तत्काल रोकने की बात दोहराई है। यूटी प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित झांजी और अधिवक्ता हिमांशु मलिक ने अदालत को आश्वस्त किया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार मौके पर यथास्थिति कायम रखी जाएगी और किसी भी अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को अपने आदेश में कैंबवाला में अदालत की अनुमति के बिना किसी भी नए निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही क्षेत्र में नए बिजली और पानी के कनेक्शन जारी करने पर भी पाबंदी लगाई गई थी।
अब लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने प्रशासन से निर्माण कराने वालों और रोक के बावजूद निर्माण होने की परिस्थितियों को लेकर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
