नगर निगम हाउस की बैठक हंगामेदार, जलभराव और फ्री पानी-पार्किंग के मुद्दे पर पार्षदों ने अफसरों को घेरा
चंडीगढ़, 20 अगस्त। चंडीगढ़ में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का मुद्दा नगर निगम हाउस की बैठक में जोरदार तरीके से उठा। बैठक के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमकर फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब नगर निगम के पास जलनिकासी और आपात स्थिति से निपटने के लिए करोड़ों रुपये की मशीनें उपलब्ध हैं, तो बारिश के दौरान उनका समय पर इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता?
मेयर ने तीखे अंदाज में कहा कि “क्या करोड़ों रुपये की मशीनें धूपबत्ती करने के लिए रखी हैं?” उन्होंने कहा कि निगम द्वारा हर बार बारिश से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब वास्तव में तेज बारिश होती है तो शहर के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
खुद जाम में फंसे, लिफ्ट लेकर मौके पर पहुंचे मेयर
मेयर सौरभ जोशी ने बैठक में अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि बारिश के दौरान वह खुद भी जाम में फंस गए थे। इसके बावजूद उन्होंने मौके तक पहुंचने के लिए लोगों से लिफ्ट ली और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधि मुश्किल परिस्थितियों के बीच मौके पर पहुंच सकते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी वहां समय पर क्यों नहीं पहुंच पाए?
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि बारिश के दौरान केवल कार्यालयों में बैठकर स्थिति की समीक्षा करने से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को खुद फील्ड में उतरकर हालात देखने होंगे और जरूरत के मुताबिक तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
‘शहर से भावनात्मक जुड़ाव नहीं होने से जमीनी हकीकत नहीं समझते अधिकारी’
मेयर ने जलभराव की समस्या की एक बड़ी वजह अधिकारियों का शहर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव नहीं होना भी बताया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में काम कर रहे अधिकारियों को शहर की समस्याओं को केवल सरकारी जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझकर देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “यहां काम करने वाले अधिकारी शहर से इमोशनली कनेक्टेड नहीं हैं।” इसी वजह से कई बार उन्हें जमीनी स्तर पर लोगों को होने वाली परेशानियों का सही अंदाजा नहीं हो पाता। मेयर ने कहा कि यदि अधिकारी खुद जलभराव वाले क्षेत्रों में जाकर स्थिति देखें, लोगों से बात करें और मौके की वास्तविक समस्या समझें, तो समाधान निकालना ज्यादा आसान होगा।
मशीनरी और संसाधनों का समय पर इस्तेमाल करने के निर्देश
मेयर ने अधिकारियों से कहा कि नगर निगम के पास जलनिकासी के लिए पर्याप्त मशीनरी और संसाधन होने के बावजूद यदि उनका समय पर इस्तेमाल नहीं होता है तो इसका कोई फायदा नहीं है। बारिश के दौरान जिन क्षेत्रों में पानी जमा होने की संभावना रहती है, वहां पहले से मशीनरी तैनात करने और जरूरत पड़ते ही तत्काल पंपिंग शुरू करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां स्थायी और प्रभावी समाधान की दिशा में काम किया जाए। केवल बारिश के समय पानी निकालने की कार्रवाई करने के बजाय नालों, बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था और ड्रेनेज नेटवर्क की कमियों को भी दूर किया जाए।
‘जिम्मेदारी तय हो, केवल दावे नहीं’
मेयर ने अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करने की नसीहत देते हुए कहा कि शहर के लोगों को बारिश के दौरान सड़कें तालाब में बदलने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल मशीनें खरीदना या तैयारियों की रिपोर्ट बनाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय उन संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर लोगों को राहत देना है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश के दौरान किसी भी शिकायत को हल्के में न लिया जाए और फील्ड में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। मेयर ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में जलभराव की स्थिति को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में जलभराव को लेकर हुई चर्चा से साफ है कि चंडीगढ़ में बारिश के बाद पैदा होने वाली समस्या अब केवल जलनिकासी का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि नगर निगम की तैयारी, मशीनरी के इस्तेमाल, अधिकारियों की जवाबदेही और जमीनी निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चंडीगढ़ नगर निगम के सदन की बैठक में वार्ड-34 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने शहर वासियों को 20000 लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध करवाने के पारित प्रस्ताव के बारे में निगम प्रशासन पर सच्चाई छुपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव 2024 में निगम हाउस की मीटिंग में सर्वसम्मति से पास किया गया था लेकिन इस प्रस्ताव को 2025 में लोकल सेक्रेटरी की ओर से रिजेक्ट कर कर वापस भेज दिया गया था। इसको रिजेक्ट किए जाने के बाद इसे नगर निगम हाउस के सामने रखा जाना चाहिए था। गाबी ने कहा कि अगर कोई प्रस्ताव पारित होने के बाद वापस आता है तो उसे नियम अनुसार निगम हाउस में द्वारा से चर्चा के लिए रखा जाता है। ऐसा ना कर कर नगर निगम प्रशासन और पूर्व मेयर ने शहर वासियों को मिलने वाली सुविधा से वंचित कर उनके साथ खिलवाड़ किया, जिसकी उन्होंने निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम हाउस से इस सिंचाई को छुपा कर पूर्व मेयर व निगम प्रशासन ने शहर वासियों के साथ अन्याय किया है।
इसके साथ ही उधर पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी द्वारा शहर में गौ मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। उन्होंने सदन में मांग रखी कि चंडीगढ़ में न केवल गौ मांस की बिक्री पर रोक लगाई जाए, बल्कि प्राकृतिक रूप से मृत गाय के मांस को काटने और उसकी बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
पार्षद गाबी ने कहा कि गौ रक्षा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ में मृत गाय के मांस की बिक्री की किसी भी संभावना को समाप्त किया जाना आवश्यक है। उनके प्रस्ताव पर सदन में चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। गाबी ने कहा कि यह निर्णय गौ संरक्षण और सनातन आस्थाओं के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों का प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए आभार व्यक्त किया।
चंडीगढ़: शहर में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव और सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी ने नगर निगम की बैठक से पहले जोरदार प्रदर्शन किया। आप पार्षद और कार्यकर्ता हाथों में छोटी नावें लेकर नगर निगम कार्यालय के बाहर पहुंचे और भाजपा शासित नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी भी की।
नाव लेकर निगम के खिलाफ प्रदर्शन
आप कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से हाथों में नावें लेकर यह संदेश देने की कोशिश की कि बारिश के बाद शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि मानसून से पहले नगर निगम की ओर से नालियों और सड़कों की सफाई के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सफाई के बाद कचरा उठाने की व्यवस्था पर सवाल
आप नेताओं ने आरोप लगाया कि नालियों और सड़कों की सफाई के बाद निकाला गया कचरा कई स्थानों पर समय पर नहीं उठाया गया। बारिश के दौरान यह कचरा बहकर दोबारा नालियों और पाइपों में पहुंच गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हुई। पार्टी ने मांग की कि जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
हर बारिश में जलभराव पर उठाए सवाल
आप पार्षदों ने कहा कि चंडीगढ़ को योजनाबद्ध शहर के रूप में जाना जाता है, लेकिन हर भारी बारिश के बाद कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा होना नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना था कि जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई और कई जगह सड़कें लंबे समय तक पानी में डूबी रहीं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की
प्रदर्शन के दौरान जब आप कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। आप नेताओं के अनुसार, कुछ पार्षदों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
अंजू कत्याल ने नगर निगम पर साधा निशाना
वार्ड-22 की आप पार्षद अंजू कत्याल ने नगर निगम पर निशाना साधते हुए कहा कि बारिश से पहले जलभराव से निपटने और सफाई व्यवस्था को लेकर तैयारियों के दावे किए गए थे, लेकिन बारिश के बाद शहर की स्थिति ने इन दावों की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि आम लोगों को जलभराव के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी।
मेयर के इस्तीफे की मांग
आप ने भाजपा शासित नगर निगम पर सफाई और जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मेयर के इस्तीफे की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि शहर में बार-बार होने वाले जलभराव का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही नालियों की नियमित सफाई, कचरे के समय पर उठान और जल निकासी व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई।
