‘दिमाग नहीं पढ़ सकते कि कुत्ता कब काटेगा, राज्यों पर सख्त करेंगे कार्रवाई’, स्ट्रीट डॉग पर सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया रुख

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक बार फिर आवारा कुत्तों के मामला में सुनवाई हुई। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान अपना रुख बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के दिमाग को नहीं पढ़ा जा सकता कि वे कब काटेंगे। कोर्ट ने साफ किया है कि जिन राज्यों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि आवारा कुत्तों पर पिछले फैसले में कोर्ट ने पहले संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर नसबंदी, टीकाकरण के बाद आश्रयों में भेजने का आदेश दिया था। बुधवार को मामले में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया ने सुनवाई की। जस्टिस मेहता ने कहा कि हम केवल यह निगरानी करने की कोशिश कर रहे हैं कि नियमों और कानूनों का पालन हो रहा है या नहीं, जो अभी तक नहीं हुआ है। जिन राज्यों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट का राजस्थान का जिक्र किया। कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं और एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी को फैसले के पक्ष में काफी गंभीर देखा जा रहा है। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों पक्षों को कहा कि आज हम सबको समय देंगे. किसी को शिकायत न रहे कि उसे नहीं सुना गया. पहले पीड़ितों को सुनेंगे, फिर डॉग लवर्स को।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों से सिर्फ रेबीज ही नहीं बल्कि सड़क दुर्घटना का भी खतरा बढ़ जाता है। डॉग लवर्स की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सभी कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना शारीरिक रूप से संभव नहीं है। बहस करते हुए सिब्बल ने कहा कि आर्थिक रूप से भी यह व्यवहार्य नहीं है। मनुष्यों के लिए भी खतरनाक है। इसे वैज्ञानिक तरीके से ही करना होगा। समस्या यह है कि कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है।

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