चंडीगढ़ कोर्ट में चलेगा मजीठिया के खिलाफ केस: हाईकोर्ट की रोक हटी, 23 फरवरी को सुनवाई, पांच साल पुराना मामला
चंडीगढ़ पुलिस से 5 साल पुराने झड़प के एक मामले में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा डेढ़ साल से लगी रोक हटाए जाने के बाद अब यह मामला चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में आगे बढ़ेगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी तय की है।
हालांकि, पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा और महेशइंदर सिंह ग्रेवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। ऐसे में अब मजीठिया सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ ही केस चलेगा।
हाईकोर्ट ने हटाई डेढ़ साल पुरानी रोक
वर्ष 2021 में मजीठिया समेत अकाली दल के 20 से अधिक नेताओं के खिलाफ सेक्टर-3 थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 186, 353, 332 और 34 के तहत केस दर्ज किया था।
डॉ. दलजीत सिंह चीमा और महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
29 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने चीमा और ग्रेवाल की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। इसी के साथ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहे मामले पर लगी रोक भी हट गई।
अब बाकी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने पर बहस होगी। शुक्रवार को भी सुनवाई होनी थी, लेकिन मजीठिया समेत कई नेता पेश नहीं हुए। उनकी ओर से एडवोकेट राजेश कुमार ने पेशी से छूट की अर्जी दायर करते हुए कहा कि अकाली दल की अहम बैठक के लिए उन्हें अमृतसर जाना है, इसलिए वे अदालत में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। अदालत ने एक दिन की छूट देते हुए अगली सुनवाई 23 फरवरी तय कर दी।
मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान हुई थी झड़प
पुलिस के अनुसार वर्ष 2021 में अकाली दल के कई नेता पंजाब में महंगाई और 1984 दंगों के मुद्दे पर चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए यूटी पुलिस ने बैरिकेड लगाकर नाकाबंदी की थी। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए, सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया और पुलिस कार्य में बाधा डाली। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
सेक्टर-3 थाना पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी। अब हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद जिला अदालत में मुकदमे की कार्रवाई तेज होगी।
