भिवानी की आशा मिड्ढा सहित एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत, नाव पलटने से हुआ था भीषण हादसा

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उत्तर प्रदेश के मथुरा (वृंदावन) में शुक्रवार को यमुना नदी में नाव पलटने से हुए एक बड़े हादसे में 10 श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो गई। इस भीषण दुर्घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि भिवानी की रहने वाली आशा मिड्ढा (55) की मौत के साथ-साथ उनके मायके के छह अन्य करीबियों की भी डूबने से मौत हो गई।

भिवानी की जगत कॉलोनी की आशा मिड्ढा का ससुराल तो भिवानी में था, लेकिन उनका मायका लुधियाना में था। इस साल उन्होंने अपने मायके वालों के साथ बांके बिहारी के दर्शन की योजना बनाई थी। आशा के पति अर्जुन दास मिड्ढा अक्सर अस्वस्थ रहते हैं, इसलिए वह अपने बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही थीं। उनके दो बेटे, अजय और दिनेश, रेलवे स्टेशन के पास ‘जगदंबा ढाबा’ चलाते हैं।

आशा के नंदोई राधेश्याम ने बताया कि भक्ति भाव से भरी आशा पिछले वर्ष भी वृंदावन गई थीं। इस बार की यात्रा के लिए वह 9 अप्रैल को अपने बेटे के साथ सोनीपत गई थीं, जहां उनकी बेटी ब्याही हुई है। बेटी के घर रुकने के बाद, रात के समय उनके दामाद और बेटी ने उन्हें मुरथल से लुधियाना से आ रही उस बस में बैठाया, जिसमें उनके मायके के लोग बैठे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि मुरथल में दी गई वह विदाई अंतिम होगी।

जानकारी के अनुसार लुधियाना के जगराओं स्थित ‘श्री बांके बिहारी क्लब’ ने 130 श्रद्धालुओं के लिए दो बसों का प्रबंध किया था। शुक्रवार सुबह श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे और बांके बिहारी के दर्शन किए। दोपहर के समय जब वे नाव के जरिए यमुना पार कर दूसरे मंदिरों की ओर जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।
बताया जा रहा कि यमुना का जलस्तर बढ़ा होने से पीपों वाले पुल को खोल दिया गया था। श्रद्धालुओं से भरी नाव तेज बहाव के कारण पुल के खंभों से टकरा गई और देखते ही देखते पलट गई।

हादसे से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो दिल झकझोर देने वाला है। वीडियो में सभी श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर राधे-राधे का कीर्तन कर रहे थे। नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे और सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि किसी भी श्रद्धालु ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। पल भर की इस चूक ने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया।

इस हादसे ने लुधियाना के बहल और गुलाटी परिवार को खत्म कर दिया। मृतकों में आशा मिड्ढा के अलावा मधुर बहल और उनकी माता कविता बहल।
चाचा चरणजीत और चाची पिंकी बहल। बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं।
भिवानी में आशा के घर के बाहर लोगों का तांता लगा हुआ है। उनके दोनों बेटे सूचना मिलते ही वृंदावन रवाना हो गए थे। शनिवार को आशा का पार्थिव शरीर भिवानी पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन और गोताखोरों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शवों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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