रोहतक जेल से फिर बाहर राम रहीम, 40 दिन की मिली पैरोल
दो साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जा चुके गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल दी गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे राम रहीम की यह 15वीं जेल रिहाई होगी, जिसने एक बार फिर हरियाणा की पैरोल नीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
इससे पहले 15 सितंबर को भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। इससे पूर्व 21 दिन और चालीस दिन की पैरोल अवधि के दौरान भी राम रहीम सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा परिसर में ही रहा था। इस बार भी प्रशासनिक संकेत यही हैं कि पैरोल के दौरान उसका ठिकाना सिरसा डेरा ही रहेगा।
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को पैरोल मिलने की खबर सामने आते ही डेरा अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई। दरअसल, जनवरी महीना डेरा के लिए विशेष महत्व रखता है। यह महीना डेरा के दूसरे गुरु सतनाम महाराज का जन्म माह माना जाता है। हर वर्ष 25 जनवरी को इस अवसर पर सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में भव्य आयोजन किया जाता है।
राम रहीम को पैरोल मिलने के बाद सिरसा में उनके आगमन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। बड़ी संख्या में सेवादार डेरा मुख्यालय की साफ सफाई और सजावट में जुट गए हैं, ताकि 25 जनवरी के कार्यक्रम से पहले पूरा परिसर तैयार किया जा सके।
पीड़ित पक्ष के सवाल
राम रहीम को बार बार पैरोल और फरलो मिलने को लेकर पीड़ित पक्ष ने पहले भी सवाल उठाए हैं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति का कहना रहा है कि राम रहीम कोई सामान्य कैदी नहीं, बल्कि गंभीर अपराधों में दोषी एक हार्ड क्रिमिनल है। ऐसे में उसे बार बार राहत देना न्याय की भावना के खिलाफ है। गंभीर अपराधों में दोषी कैदी को बार बार बाहर आने की अनुमति दिए जाने से न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि समाज के बड़े हिस्से में असंतोष है।
