राघव चड्ढा ने संसद में खोली मोबाइल कंपनियों की पोल, संचार के अधिकार छीनने का लगाया आरोप
आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्डा ने संसद में मोबाइल कंपनियों की मनमानी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि मोबाइल कंपनियां न केवल कॉल के नाम पर बल्कि डेटा के नाम पर भी मनमानी कर रही हैं। उन्होंने संसद से मोबाइल ऑपरेटरों पर नकेल कसने के लिए तीन मांग रखी हैं।
आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में 12.5 अरब मोबाइल फोन उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से 90 फीसद प्रीपेड प्लान के उपयोगकर्ता हैं। जब आपका प्रीपेड प्लान खत्म हो जाता है, या आपका मोबाइल रिचार्ज खत्म हो जाता है, तो आपकी आवाज बंद हो जाती है। यह समझ में आता है कि रिचार्ज खत्म होने के बाद आउटगोइंग कॉल बंद हो जाती हैं, लेकिन इनकमिंग कॉल बंद करना पूरी तरह से मनमाना है।
उन्होंने कहा कि आज हमारा मोबाइल नंबर हमारी डिजिटल पहचान बन गया है। इनकमिंग कॉल बंद करना किसी सेवा को बंद करना नहीं है। यह हमारे संचार के अधिकार को छीनने जैसा है। उन्होंने कहा कि मैं सदन में मुफ्त आउटगोइंग कॉल की मांग नहीं कर रहा हूं। मैं मुफ्त डेटा की मांग नहीं कर रहा हूं। लेकिन, इनकमिंग कॉल की सुविधा की गारंटी होनी चाहिए।
राघव चड्ढा ने तीन मांगें रखी
राघव चड्ढा ने तीन मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि पहली मांग आपके प्रीपेड मोबाइल कनेक्शन पर इनकमिंग कॉल और इनकमिंग एसएमएस कम से कम एक साल तक जारी रहने चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपका मोबाइल नंबर निष्क्रिय कर दिया जाए और किसी और को आवंटित कर दिया जाए। दूसरी मांग, अंतिम रिचार्ज की तारीख से कम से कम तीन साल की छूट अवधि दी जानी चाहिए। तीसरी मांग यह है कि मोबाइल ऑपरेटरों को उन लोगों के लिए कम लागत वाले केवल इनकमिंग कॉल प्लान शुरू करने चाहिए जो फोन का उपयोग केवल इनकमिंग कॉल के लिए करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रीपेड ग्राहकों को एक और समस्या का सामना करना पड़ता है। टेलीकॉम ऑपरेटर का 28 दिन का मासिक रिचार्ज प्लान। एक साल में बारह महीने होते हैं, लेकिन आपको 28 दिन के रिचार्ज प्लान का इस्तेमाल करके तेरह बार रिचार्ज करना होगा। 28 दिन को तेरह बार करने पर तीन सौ चौंसठ दिन होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही चालाक रणनीति है, जिससे आपको तीस दिन की छूट का एहसास होता है, लेकिन असल में आपसे 28 दिन तक ही काम लिया जाता है। राघव चड्ढा ने कहा कि मोबाइल आज के समय में लग्जरी नहीं आम नागरिक की जरूरत बन चुका है। इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए।
