राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संत प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात, आध्यात्म से लेकर समाज सेवा तक कई मुद्दों पर हुई चर्चा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर प्रदेश के अपने दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह संत प्रेमानंद से मुलाकात कर उनसे आध्यात्मिक चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति 19 मार्च से उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। बृहस्पतिवार को अयोध्या में दर्शन-पूजन के बाद वह मथुरा पहुंचीं, जहां उन्होंने मंदिरों में पूजा-अर्चना की और कई अन्य कार्यक्रमों में भाग लिया।
शुक्रवार सुबह उन्होंने आध्यात्मिक कार्यक्रमों से दिन की शुरुआत की। राष्ट्रपति राधा केली कुंज स्थित संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचीं, जहां उन्होंने संत के प्रवचन सुने। यह सप्ताह इसलिए भी विशेष है क्योंकि बृहस्पतिवार को संत प्रेमानंद जी महाराज का जन्मदिन था।
आश्रम में राष्ट्रपति ने संत से आध्यात्मिक चर्चा की और उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया। संत प्रेमानंद ने प्रसन्न मुद्रा में ’राधे-राधे’ कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। मुर्मू ने संत प्रेमानंद महाराज को जन्मदिन की बधाई भी दी।
आश्रम पहुंचने पर संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों और सहयोगियों ने द्रौपदी मुर्मू का पारंपरिक और भव्य तरीके से स्वागत किया। इस दौरान दोनों के बीच एकांत में बातचीत हुई, जिसमें अध्यात्म, सेवा और जनकल्याण जैसे अहम विषयों पर चर्चा की गई। राष्ट्रपति ने महाराज के सादगीपूर्ण जीवन और उनके आध्यात्मिक विचारों के प्रति गहरी आस्था जताई। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई इस मुलाकात के दौरान आश्रम का माहौल पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
मथुरा के वृंदावन में रहने वाले संत प्रेमानंद महाराज आज के समय के चर्चित आध्यात्मिक संतों में से एक हैं। अपनी सरल भाषा, गहरी भक्ति और सहज प्रवचनों के जरिए उन्होंने देशभर में लाखों लोगों को प्रभावित किया है। संत प्रेमानंद महाराज खास तौर पर राधा-कृष्ण भक्ति और ‘राधे-राधे’ नाम जप के प्रचार के लिए जाने जाते हैं। उनके आश्रम में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां वे आध्यात्मिक ज्ञान, सेवा और जीवन मूल्यों पर प्रवचन देते हैं।
डिजिटल दौर में भी उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से उनके प्रवचन देश-विदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में उनसे जुड़ रहा है। संत का जीवन बेहद सादा और अनुशासित माना जाता है। वे भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर भक्ति, साधना और समाज सेवा को ही जीवन का मूल उद्देश्य बताते हैं। उनके अनुयायी उन्हें प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रतीक मानते हैं।
