हरियाणा IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: 580 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में मास्टरमाइंड सहित चार गिरफ्तार, आज होगी पेशी

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सरकारी विभागों के खातों में हुए 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में गिरफ्तार आरोपितों को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) आज अदालत में पेश करेगी। एसीबी ने इस मामले में कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि 18 सरकारी विभागों के बैंक खाते चंडीगढ़ स्थित विभिन्न बैंकों में खोले गए थे। अब कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। एसीबी इस बात की जांच कर रही है कि पंचकूला की बजाय चंडीगढ़ की विशेष शाखाओं में खाते क्यों और किन परिस्थितियों में खुलवाए गए।

सूत्रों के अनुसार, इस 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड में शामिल बैंक कर्मचारियों ने फर्जी फर्मों के खाते खोलने में अहम भूमिका निभाई। आरोप है कि इंटरनल प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए सरकारी विभागों के खातों से धनराशि फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर की जाती थी। जरूरत पड़ने पर रकम को वापस विभागीय खातों में डाल दिया जाता था, ताकि संदेह न हो।

गलत तरीके से खाते खोलना और फंड ट्रांसफर की जिम्मेदारी संबंधित बैंक कर्मियों के पास थी। सरकारी धन को ठिकाने लगाने में तथाकथित ‘बीच की कड़ी’ का भी अहम रोल सामने आया है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि निजी खिलाड़ियों ने ही पूरे खेल को अंजाम दिया। आरोप है कि ये लोग सरकारी विभागों में तैनात आईएएस अधिकारियों और खाता खोलने की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें लालच देते थे।

बताया जा रहा है कि उनकी सलाह पर ही खातों को पंचकूला की बजाय चंडीगढ़ की निर्धारित शाखाओं में खुलवाया गया। इसके बाद धनराशि फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दी जाती थी और वहां से शेयर मार्केट व अन्य माध्यमों में निवेश कर रकम को घुमाया जाता था।

एसीबी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच के दायरे में विभागीय अधिकारी, बैंक कर्मचारी और निजी कंपनियों से जुड़े लोग भी आ सकते हैं। अदालत में पेशी के बाद आरोपितों से रिमांड लेकर पूछताछ की संभावना है, जिससे इस बहुस्तरीय घोटाले के और खुलासे हो सकते हैं।

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