फिलहाल शहर में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों का संचालन केवल निजी संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए चंडीगढ़ परिवहन विभाग ने टाटा और महिंद्रा जैसी नामी कंपनियों को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। जो भी कंपनी चंडीगढ़ में रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और इसे ऑपरेट करना चाहती है, वह 27 फरवरी तक अपना ईओआई स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सेक्रेटरी साैंप सकती है। प्रशासन जो कंपनी फाइनल करेगी, वह इस सेंटर को बनाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी।
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सेक्रेटरी अमित कुमार ने बताया कि अभी तक आरडीटीसी के लिए उनके पास लोकल स्तर पर ही कुछ कंपनियां संपर्क कर रही थी लेकिन अब टाटा-महिंद्रा जैसी कंपनियां भी रुचि दिखा रही है।
एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आने के बाद किसी एक कंपनी को फाइनल करने से पहले प्रेजेंटेशन ली जाएगी और साइट विजिट भी कराई जाएगी। आरडीटीसी में पेशेवर ड्राइवर प्रशिक्षण, मोटर वाहन संचालन, तकनीकी ज्ञान और वाहन रखरखाव से जुड़ी आधुनिक ट्रेनिंग दी जाएगी। यह सेंटर न केवल नए ड्राइवरों को प्रशिक्षित करेगा बल्कि पहले से कार्यरत ड्राइवरों और प्रशिक्षकों को भी नई वाहन तकनीकों और सड़क सुरक्षा मानकों से अवगत कराएगा।सेक्रेटरी अमित कुमार ने बताया कि रायपुर कलां में लगभग चार एकड़ में बनने वाले रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) में आधुनिक ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर्स, स्पेशल ड्राइविंग ट्रैक और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य बेहतर प्रशिक्षण के माध्यम से कुशल ड्राइवर तैयार करना है ताकि सड़क हादसों और दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाया जा सके।
इस ट्रेनिंग सेंटर में लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) और हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी) यानी कार, ट्रक और बस चलाने वाले ड्राइवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही आम जनता भी यहां ड्राइविंग ट्रेनिंग ले सकेगी। वर्तमान में शहरवासी निजी ड्राइविंग स्कूलों से प्रशिक्षण लेते हैं लेकिन इस सरकारी ट्रेनिंग सेंटर से ड्राइविंग सीखने पर प्रमाणपत्र भी जारी किया जाएगा जो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय मान्य होगा। भारी वाहनों से माल ढोने वाले ड्राइवरों को भी यहां विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशासन के रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) से एक माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। यह चंडीगढ़ की रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में मान्य होगा। इस प्रमाणपत्र के आधार पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा। इसके अलावा प्रशासन के अधीन विभिन्न विभागों में नियुक्त किए जाने वाले सभी ड्राइवरों को भी इसी सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस ट्रेनिंग सेंटर में न्यूनतम 29 घंटे का कोर्स अनिवार्य रखा गया है। कोर्स के दौरान 8 घंटे यातायात नियमों से संबंधित सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 21 घंटे व्यावहारिक रूप से ड्राइविंग स्किल्स सिखाई जाएंगी।