चंडीगढ़ में CBI का बड़ा एक्शन, Berkeley और Godrej के अफसरों पर 420 का केस दर्ज, क्या है मामला?

चंडीगढ़। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ की दो बड़ी कंपनियों बर्कले रियलटेक लिमिटेड, गोदरेज एस्टेट डेवलपर्स और एस्टेट ऑफिस के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2),13(1)(डी)के तहत केस दर्ज कर लिया है।
आरोप है कि एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों की मिलीभगत से इन दोनों कंपनियों ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तैयार किए लेकिन इन्होंने संबंधित विभागों से एनवायरनमेंट और वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस ही नहीं ली। जबकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से 2006 में जारी एक अधिसूचना के तहत ये दोनों मंजूरी लेनी आवश्यक थी।
फंस सकते हैं एस्टेट ऑफिस के कई बड़े अधिकारी
अधिकारियों ने इन दोनों कंपनियों को नजरअंदाज किया, इनके प्रोजेक्ट बनने दिए गए और यहां तक कि इन्हें ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी कर फायदा भी पहुंचाया गया। इस बारे में जब पंजाब के गवर्नर व यूटी के प्रशासक को जानकारी मिली तो उनके कार्यालय की ओर से सीबीआई को शिकायत दी गई।
पंजाब राजभवन के अंडर सेक्रेटरी भीमसेन गर्ग की शिकायत पर सीबीआई ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में एस्टेट ऑफिस के कई बड़े अधिकारी भी फंस सकते हैं।पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति (एनवायरनमेंट क्लीयरेंस)और वन्यजीव मंजूरी(वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस)आवश्यक थी।
सीबीआई जांच में ये स्पष्ट हो गया कि दोनों कंपनियों ने बिना उचित स्वीकृति के ही निर्माण कार्य पूरा कर लिया। जबकि एस्टेट ऑफिस के अधिकारी दोनों कंपनियों की इस अनियमितताओं पर खामोश रहे।
दोनों कंपनियों ने ऐसे की धोखाधड़ी
सीबीआई जांच के मुताबिक बर्कले रियलटेक लिमिटेड ने प्रोजेक्ट ‘बर्कले स्क्वायर’ के लिए 12 अगस्त 2014 को वन्यजीव मंजूरी के लिए आवेदन किया था। तब चंडीगढ़ में सुखना वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी और सिटी बर्ड सेंक्चुरी सेक्टर-21 के लिए इको-सेंसेटिव जोन का दायरा 10 किलोमीटर था। कंपनी ने जानबूझकर अपना प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद मंजूरी के लिए आवेदन किया।
18 सितंबर 2015 को उप वनसरंक्षक की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जिसमें पाया गया कि ये प्रोजेक्ट सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी से 5.20 किलोमीटर और सेक्टर-21 की बर्ड सेंक्चुरी से 3.20 किलोमीटर दूर था। इसी तरह गोदरेज एस्टेट डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी अपने प्रोजेक्ट ‘गोदरेज इटर्निया’ के लिए सात नवंबर 2014 को वन्यजीव मंजूरी के लिए आवेदन किया था।
22 दिसंबर 2014 को जब वन विभाग की टीम ने यहां निरीक्षण किया तो ये प्रोजेक्ट सुखना वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से 6.60 किमी और सिटी बर्ड सेंक्चुरी से 4.0 किमी की दूरी पर मिला। ऐसे में इन दोनों प्रोजेक्ट के लिए एनवायरनमेंट और वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस जरूरी थी, लेकिन कंपनियों ने ये मंजूरी ली ही नहीं। उल्टा, बिना मंजूरी प्रोजेक्ट भी पूरे कर लिए।
पर्यावरण मंत्रालय के आदेश पर कंपनियों के ओसी रद्द
सीबीआई जांच में सामने आया कि एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों की मिलीभगत से दोनों कंपनियों को अवैध रूप से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट(ओसी) जारी किया गया। बर्कले स्क्वायर प्रोजेक्ट को 29 अप्रैल 2016 और गोदरेज इटरनिया को नौ जून 2015 को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट दिया गया। पर्यावरण मंत्रालय तक ये मामला पहुंचा तो मंत्रालय ने चार अप्रैल 2024 को यूटी प्रशासन को एक पत्र जारी किया।
इस पत्र में मंत्रालय ने कहा कि 2017 से पहले किए गए सभी निर्माण कार्य वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन हैं। मंत्रालय के इस पत्र के बाद चंडीगढ़ प्रशासन हरकत में आया और उन्होंने पिछले साल दोनों कंपनियों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट(ओसी) रद्द कर दिए। हालांकि, सीबीआई ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।